
मुंबई। इस वर्ष का खरीफ सीजन एल नीनो, बदलते मौसम और वैश्विक उर्वरक परिस्थितियों के कारण चुनौतीपूर्ण रहने की संभावना है। हालांकि किसानों को समय पर ऋण उपलब्ध कराकर, उर्वरकों का उचित प्रबंधन करते हुए और आधुनिक तकनीक के उपयोग से इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया जाएगा। यह विश्वास मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने व्यक्त किया। गुरुवार को सह्याद्री अतिथि गृह में आयोजित राज्यस्तरीय खरीफ सीजन समीक्षा बैठक 2026 में मुख्यमंत्री फडणवीस बोल रहे थे। बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे सहित विभिन्न विभागों के मंत्री, अधिकारी और कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित थे।मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार जून में संतोषजनक वर्षा होने की संभावना है, लेकिन जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश कम हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग को मौसम आधारित फसल नियोजन करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में बीजों की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। कपास के बढ़ते दामों के कारण इस वर्ष कपास की खेती बढ़ने की संभावना जताई गई है। इसके अनुसार कृषि विभाग को विशेष योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को समय पर फसल ऋण मिले, इसके लिए बैंकों को सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। केवल सिबिल स्कोर के आधार पर किसानों को ऋण से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि राज्य में उर्वरकों का लगभग 25 प्रतिशत पुराना स्टॉक उपलब्ध है और नया स्टॉक भी जल्द आने वाला है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण उर्वरकों पर दबाव बन सकता है। इसलिए जमाखोरी, गलत उपयोग और डायवर्जन रोकने के लिए जिला स्तर पर सख्त योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं।आधुनिक तकनीक पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र की खेती अब केवल पानी पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि डेटा, ड्रोन और डिजिटल तकनीक आधारित आधुनिक कृषि की दिशा में आगे बढ़ रही है। महाराष्ट्र कृषि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), जनरेटिव एआई, ड्रोन और एग्रीस्टैक नीति लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। ‘महाविस्तार एआई’ प्रणाली के माध्यम से वर्तमान में 40 लाख किसानों को मौसम, बाजार भाव, उर्वरक मात्रा, फसल सलाह और कीट-रोग प्रबंधन की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। एआई के उपयोग से उत्पादन लागत में 25 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना है। राज्य के 1.71 करोड़ किसानों में से 1.32 करोड़ किसानों की फार्मर आईडी पंजीकरण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसमें 1.95 लाख वनपट्टा धारकों को भी शामिल किया गया है। इससे पीएम किसान, फसल बीमा, ऋण और मुआवजा योजनाओं का लाभ अधिक आसानी से मिल सकेगा।
डिजिटल कृषि योजनाओं का शुभारंभ
बैठक में कृषि क्षेत्र से जुड़े कई आधुनिक डिजिटल उपक्रमों का शुभारंभ किया गया। इनमें ‘महाविस्तार 2.0’ ऐप, ‘वसुधा एआई सेवा’, ‘क्रॉपसैप 2.0’, ‘महाट्रेस’ और पी-सीबीडीसी आधारित अनुदान वितरण प्रणाली शामिल हैं। ‘महाविस्तार 2.0’ ऐप में किसान डायरी, मौसम पूर्वानुमान, बाजार भाव, कीट-रोग पहचान, फसल सलाह और एआई आधारित चैटबॉट सुविधा उपलब्ध कराई गई है। वहीं ‘वसुधा एआई सेवा’ के तहत किसान टोल फ्री नंबर 155313 पर सीधे कृषि सलाह प्राप्त कर सकते हैं। ‘क्रॉपसैप 2.0’ प्रणाली के माध्यम से किसानों को फसलों में लगने वाले कीट और रोगों के प्रबंधन के लिए त्वरित तकनीकी मार्गदर्शन मिलेगा। वहीं ‘महाट्रेस’ योजना के जरिए महाराष्ट्र के कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार में अधिक विश्वसनीय पहचान और ट्रेसिबिलिटी मिलेगी।
खरीफ सीजन के लिए कृषि विभाग की व्यापक तैयारी
कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने बताया कि खरीफ सीजन के लिए जिला और तहसील स्तर पर विस्तृत योजना तैयार की गई है। राज्य में लगभग 20.16 लाख क्विंटल बीजों की आवश्यकता है, जबकि 28.06 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। साथ ही उर्वरकों का पर्याप्त भंडार भी सुरक्षित रखा गया है। एल नीनो की संभावित स्थिति को देखते हुए ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर सिंचाई, मल्चिंग, जैविक खाद, चौड़ी क्यारियां तथा जलवायु परिवर्तन सहनशील बीजों के उपयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। राज्यमंत्री आशीष जयसवाल ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने तथा प्राकृतिक और जैविक खेती को अपनाने की अपील की।




