
पुणे। दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल द्वारा पैसे के अभाव में इलाज न देने के कारण गर्भवती महिला तनिषा भिसे (27) की मौत के मामले ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। 29 मार्च को हुई इस दुखद घटना के बाद, महिला के परिवार ने आरोप लगाया था कि अस्पताल ने 10 लाख रुपये की मांग की और इलाज से इनकार कर दिया, जिससे महिला की जान चली गई। मंगलवार को एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि “अस्पताल पैसे को जीवन से ऊपर रख रहा है, यह अत्यंत चिंताजनक है।” उन्होंने पुणे नगर निगम पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि “जब आम नागरिक 10-20 हजार रुपये का टैक्स नहीं भरता, तो उनके घर के सामने बैंड बजाया जाता है। लेकिन दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल पर 27 करोड़ रुपये बकाया होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जाती? सुले ने चेतावनी दी कि यदि 48 घंटे में बकाया कर जमा नहीं किया गया तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि “तनिषा को साढ़े पांच घंटे अस्पताल में रखा गया और 10 लाख रुपये की मांग की गई। यह सीधा हत्या का मामला है। सांसद सुले ने तनिषा के परिवार से मुलाकात कर उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया। उन्होंने राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए पूछा, “सरकार किस बात का इंतज़ार कर रही है? क्या अब दस समितियों की रिपोर्ट ली जाएंगी?” उन्होंने अस्पताल की भूमिका को “गैर-जिम्मेदाराना और आपराधिक” बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की। इस मुद्दे को संसद के बजट सत्र में भी उठाते हुए सुले ने स्वास्थ्य विभाग में फैले भ्रष्टाचार और ढांचागत विफलताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि “सरकारी अस्पतालों पर खर्च कम हो गया है, और ऐसे में निजी अस्पतालों की जवाबदेही और भी जरूरी हो जाती है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी टैरिफ के चलते भारतीय बाजारों पर पड़े असर की भी चर्चा की और सरकार से मध्यम वर्ग और ईमानदार करदाताओं को राहत देने की मांग की। इस विषय में भारत की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए 26 प्रतिशत टैरिफ पर प्रतिरोध की संभावना पर अटकलें भी लगाई जा रही हैं, हालांकि सरकार फिलहाल कूटनीतिक समाधान की ओर झुकती दिख रही है।




