Saturday, April 4, 2026
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झांसी में गेहूं खरीद को लेकर सख्ती: किसानों के उत्पीड़न पर होगी केंद्र प्रभारी पर कार्रवाई, डीएम के कड़े निर्देश

देवेश प्रताप सिंह राठौर
झांसी, उत्तर प्रदेश।
झांसी जनपद में 30 मार्च 2026 से शुरू हुई सरकारी गेहूं खरीद प्रक्रिया को सुचारू और पारदर्शी बनाने के लिए जिलाधिकारी मृदुल चौधरी ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि किसी भी गेहूं क्रय केंद्र पर किसानों के उत्पीड़न की शिकायत मिलने पर संबंधित केंद्र प्रभारी को सीधे जिम्मेदार ठहराते हुए कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मूल्य समर्थन योजना के तहत जिले में स्थापित 66 गेहूं क्रय केंद्रों की निगरानी के लिए एसडीएम सहित नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। जिलाधिकारी ने केंद्रों के आसपास सक्रिय बिचौलियों पर नजर रखने और निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों को तुरंत दूर करने के निर्देश भी दिए हैं। जनपद के सभी क्रय केंद्रों पर 31 बिंदुओं वाली चेकलिस्ट के आधार पर निगरानी और निरीक्षण शुरू कर दिया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2,585 प्रति क्विंटल सुनिश्चित करना है। साथ ही, केंद्रों पर फ्लैक्स, तौल कांटे, पेयजल और बैठने की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मृदुल चौधरी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि खरीद के बाद 48 से 72 घंटे के भीतर किसानों को भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे अपनी उपज बिचौलियों को कम कीमत पर न बेचें, बल्कि सीधे सरकारी क्रय केंद्रों पर ही बिक्री करें। जिला खाद्य विपणन अधिकारी संतोष कुमार पटेल ने बताया कि जिले में 30 मार्च से खरीद प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अब तक 195 किसानों से करीब 15,000 क्विंटल गेहूं की खरीद की जा चुकी है। हालांकि, शासन से अभी तक जिले के लिए कुल खरीद लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जनपद में 621 गांठ बोरे उपलब्ध हैं और सभी क्रय केंद्रों तक पहुंचा दिए गए हैं। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी बोरों की कोई कमी नहीं है। वर्तमान में गेहूं की कटाई जारी है, इसलिए आने वाले दिनों में खरीद प्रक्रिया में और तेजी आने की उम्मीद है। प्रशासन द्वारा तय रणनीति और सख्त निगरानी के चलते किसानों में इस बार खरीद प्रक्रिया को लेकर उत्साह देखा जा रहा है, और वे अपनी फसल को उचित मूल्य पर बेचने के लिए सरकारी केंद्रों की ओर रुख कर रहे हैं।

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