मुंबई। महाराष्ट्र राज्य वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन और राज्य सहकारी मार्केटिंग फेडरेशन के माध्यम से राज्य में कृषि भंडारण क्षमता बढ़ाने का काम तेज़ी से किया जा रहा है। समृद्धि महामार्ग के किनारे तथा अन्य स्थानों पर एग्रो लॉजिस्टिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं और किसान-केंद्रित डिजिटल भंडारण व्यवस्था को गति दी जा रही है। राज्य के विपणन मंत्री जयकुमार रावल ने कहा कि किसानों द्वारा गोदामों में रखे गए कृषि उत्पादों पर ब्लॉकचेन तकनीक आधारित गोदाम रसीद के अनुसार ऑनलाइन गिरवी ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इतनी तेज़ी से डिजिटल गिरवी ऋण सुविधा उपलब्ध कराने वाला महाराष्ट्र देश का पहला राज्य बन गया है और किसानों को इसका अधिक लाभ लेना चाहिए। बुधवार को सह्याद्री अतिथि गृह में आयोजित महाराष्ट्र राज्य वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन की समीक्षा बैठक में मंत्री जयकुमार रावल बोल रहे थे। बैठक में विभाग के प्रधान सचिव प्रवीण दराडे, महाराष्ट्र राज्य सहकारी कपास उत्पादक विपणन महासंघ के प्रबंध निदेशक अभय महाजन, महाराष्ट्र राज्य वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कौस्तुभ दिवेगावकर, राज्य सहकारी मार्केटिंग फेडरेशन के प्रबंध निदेशक राहुल कुलकर्णी, कृषि विपणन मंडल के प्रबंध निदेशक संजय कदम तथा विपणन निदेशक शरद जरे उपस्थित थे। 21 लाख मीट्रिक टन से अधिक भंडारण क्षमता मंत्री रावल ने बताया कि महाराष्ट्र राज्य वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन और मार्केटिंग फेडरेशन की कुल भंडारण क्षमता 21 लाख 18 हजार मीट्रिक टन है, जिसे और बढ़ाने की दिशा में काम जारी है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र राज्य वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन और महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक के बीच हुए समझौते के तहत ब्लॉकचेन तकनीक आधारित गिरवी ऋण योजना 9 प्रतिशत ब्याज दर पर चलाई जा रही है। इस योजना के अंतर्गत किसानों को गोदाम में रखे कृषि उत्पादों के बदले केवल 24 घंटे के भीतर सीधे बैंक खाते में ऋण राशि जमा की जाती है। व्यक्तिगत किसानों को 5 लाख रुपये तक, जबकि किसान उत्पादक कंपनियों और सामुदायिक संस्थाओं को 70 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक 214 करोड़ रुपये से अधिक ऋण वितरित मंत्री जयकुमार रावल ने जानकारी दी कि ब्लॉकचेन कृषि उपज गिरवी ऋण योजना के तहत अब तक 8,131 किसानों और 442 किसान उत्पादक संगठनों को कुल 214.58 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इस योजना से किसानों को बैंकों के चक्कर लगाए बिना डिजिटल माध्यम से त्वरित ऋण सुविधा मिल रही है। समृद्धि महामार्ग पर बनेंगे एग्रो लॉजिस्टिक पार्क बैठक में राज्य के गोदाम नेटवर्क के विस्तार, बुनियादी सुविधाओं के आधुनिकीकरण और किसानों को तकनीक आधारित सेवाएं उपलब्ध कराने पर विस्तार से चर्चा हुई। समृद्धि महामार्ग के किनारे प्रस्तावित एग्रो लॉजिस्टिक पार्कों की भी समीक्षा की गई। मंत्री रावल ने कहा कि इन परियोजनाओं के माध्यम से कृषि उत्पादों का परिवहन, भंडारण और बाजार से सीधा संपर्क अधिक आसान होगा। साथ ही विभिन्न निगमों की खाली पड़ी संपत्तियों और गोदामों का किसानों के हित में अधिक प्रभावी उपयोग करने की योजना पर भी चर्चा की गई। अमरावती, वाशिम, बुलढाणा, अहिल्यानगर और मेहकर क्षेत्रों में गोदाम सुविधाओं के विस्तार पर भी बैठक में चर्चा हुई। अमरावती के धामणगांव, वाशिम, अकोला तथा बुलढाणा-मेहकर क्षेत्रों में भंडारण और वितरण क्षमता को मजबूत किया जा रहा है। अहिल्यानगर में आधुनिक लॉजिस्टिक चेन विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इंटीग्रेटेड कॉटन लॉजिस्टिक पार्क बनेगा बैठक में समृद्धि महामार्ग के किनारे 32 एकड़ क्षेत्र में विकसित किए जाने वाले “इंटीग्रेटेड कॉटन लॉजिस्टिक पार्क” परियोजना की भी समीक्षा की गई। लगभग 28 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रकल्प में आधुनिक गोदाम, जिनिंग और प्रेसिंग यूनिट, गुणवत्ता परीक्षण केंद्र तथा अत्याधुनिक भंडारण सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मंत्री रावल ने विश्वास जताया कि इस परियोजना से राज्य के कपास उत्पादक किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। किसानों को मिलेगा रियल टाइम बाजार भाव मंत्री जयकुमार रावल ने कहा कि भविष्य में किसानों को उनके गोदाम में रखे कृषि उत्पादों की बिक्री के लिए “रियल टाइम डेटा” एक क्लिक पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे किसानों को देश की विभिन्न कृषि मंडियों में चल रहे भावों की जानकारी तुरंत मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि किसानों को अपने संग्रहित कृषि उत्पादों की देश और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऑनलाइन बिक्री की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इस डिजिटल व्यवस्था को जल्द विकसित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को समन्वय के साथ तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।