Thursday, May 21, 2026
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सड़क पर रहने वाले बच्चों के पुनर्वास के लिए ‘फिरते पथक’ योजना का विस्तार, 31 महानगरपालिकाओं से मांगे जाएंगे प्रस्ताव

मुंबई। सड़क पर रहने वाले, अनाथ, एकल और उपेक्षित बच्चों के पुनर्वास के लिए शुरू की गई ‘फिरते पथक’ (मोबाइल टीम) पायलट योजना को अब महाराष्ट्र के 22 जिलों की 31 महानगरपालिकाओं तक विस्तारित किया जाएगा। महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने इस योजना के विस्तार के लिए प्रस्ताव आमंत्रित करने के निर्देश दिए हैं। बुधवार को मंत्रालय में आयोजित ‘फिरते पथक’ योजना की समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
मोबाइल वाहनों के जरिए बच्चों तक पहुंचेगी सहायता
इस योजना के अंतर्गत मोबाइल वाहनों के माध्यम से सड़क पर रहने वाले बच्चों को पौष्टिक आहार, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और मनोरंजन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। साथ ही बच्चों का आधार पंजीकरण, काउंसलिंग, मानसिक सहयोग तथा अभिभावकों में शिक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करने का काम भी किया जाता है। सरकार का उद्देश्य ऐसे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और उनका समुचित पुनर्वास करना है।
छह जिलों में सफल रहा पायलट प्रोजेक्ट
इससे पहले नाशिक, पुणे, मुंबई शहर, मुंबई उपनगर, ठाणे और नागपुर जिलों में यह परियोजना सफलतापूर्वक चलाई गई थी। इस योजना के माध्यम से अब तक 3,803 बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन और पोषण संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें पुणे जिले के 1,679 बच्चे, मुंबई शहर के 810, ठाणे के 750, नाशिक के 285 और नागपुर के 279 बच्चे शामिल हैं।
अब 31 मोबाइल टीमों का गठन
राज्य सरकार ने अब 28 महानगरपालिका क्षेत्रों के साथ मुंबई शहर, पूर्व उपनगर और पश्चिम उपनगर मिलाकर कुल 31 मोबाइल टीमों के गठन का प्रस्ताव तैयार किया है। मंत्री आदिती तटकरे ने कहा कि योजना में भाग लेने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं के लिए मुंबई सार्वजनिक ट्रस्ट अधिनियम के तहत पंजीकरण, निधि पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन, पिछले तीन वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट तथा संस्था के संविधान और नियमावली प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
सीसीटीवी और ट्रैकिंग सिस्टम होंगे अनिवार्य
उन्होंने बताया कि मोबाइल टीमों के वाहनों में सीसीटीवी कैमरे और ट्रैकिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य किया जाएगा। यह व्यवस्था संबंधित पुलिस विभाग के समन्वय से संचालित होगी। संबंधित संस्थाओं को बाल कल्याण समिति, बाल अधिकार आयोग और स्थानीय पुलिस प्रशासन को अपने कार्यक्षेत्र की जानकारी देना भी आवश्यक होगा। सरकार जल्द ही नए आवेदन आमंत्रित करेगी और पूरी प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई संस्था नियमों का उल्लंघन करती है तो उसका अनुबंध रद्द कर वैकल्पिक संस्था नियुक्त की जाएगी।

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