
मुंबई। ठाणे जिले के खडवली स्थित एक अनधिकृत निजी बालगृह में सामने आए अत्याचार मामले के बाद राज्य की महिला एवं बाल सुरक्षा को लेकर चिंताएं और सख्त हुई हैं। इसी के तहत विधानपरिषद की उपसभापति डॉ. नीलम गोऱ्हे की अध्यक्षता में विधानभवन में एक विशेष समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य के सभी बालगृहों पर निगरानी रखने हेतु महिला दक्षता समितियों की उपसमितियां गठित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के अवर सचिव प्रसाद कुलकर्णी, उपायुक्त सुवर्णा पवार, विशेष पुलिस महानिरीक्षक संजय दराडे (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से), जांच अधिकारी सुरेश कदम, अपर जिलाधिकारी हरिशचंद्र पाटिल, जिला महिला बाल विकास अधिकारी संजय भोसले और सहआयुक्त राहुल मोरे मौजूद थे। डॉ. गोऱ्हे ने कहा कि प्रत्येक पुलिस थाना क्षेत्र में स्थित बालगृहों की सतत निगरानी की जाए और किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, मारपीट या अन्य शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही अनधिकृत संस्थाओं की पहचान करने के लिए समाज कल्याण, आदिवासी विकास और शिक्षा विभाग जैसे संबंधित विभागों के दस्तावेजों का समन्वय कर ‘डिस्ट्रिक्ट मैपिंग’ की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि मानव तस्करी से मुक्त कराई गई बच्चियों की प्रेरणादायी कहानियों को समाज के सामने लाया जाए। एक उदाहरण साझा करते हुए उन्होंने बताया, “जब एक बचाई गई बच्ची से पूछा गया कि वह भविष्य में क्या बनना चाहती है, तो उसने जवाब दिया – मुझे पुलिस बनना है, ताकि जिसने मुझे बेचा उसे पकड़ सकूं।” ऐसी कहानियों को सोशल मीडिया, महिला बचत समूहों और सरकारी कार्यक्रमों के माध्यम से प्रसारित किया जाना चाहिए। डॉ. गोऱ्हे ने यह भी कहा कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए सभी संबंधित विभागों को लगातार सक्रिय रहना चाहिए। बचाई गई बच्चियों का पुनर्वास, उनकी सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि हर दो महीने में विभागीय स्तर पर समीक्षा बैठक होनी चाहिए और जिलाधिकारियों को 15 जून से पहले सभी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश भी दिए। साथ ही, इस गंभीर प्रकरण के मद्देनजर एक व्यापक कार्य योजना लागू की जाएगी।




