Wednesday, May 13, 2026
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स्मार्ट क्लास बनी ‘मिनी स्पेस लैब’, बच्चों ने समझा चांद-मंगल का विज्ञान

चंद्रमा पर अल्फीसा का वजन हुआ छह किलो, मंगल पर पानी खोजती रही अंकिता

उन्नाव, उत्तर प्रदेश। उच्च प्राथमिक विद्यालय रामपुर गढ़ौवा में आयोजित “आओ अंतरिक्ष की सैर करें” गतिविधि के दौरान स्मार्ट क्लास ‘मिनी स्पेस लैब’ में बदल गई, जहां बच्चों ने चंद्रमा, मंगल और अंतरिक्ष विज्ञान को अनुभव आधारित तरीके से समझा। स्मार्ट स्क्रीन पर चंद्रयान, मंगल मिशन, रॉकेट लॉन्चिंग और अंतरिक्ष यात्रियों से जुड़े दृश्य चलते रहे, जिन्हें देखकर बच्चे खुद को स्पेस मिशन का हिस्सा महसूस करते दिखाई दिए।गतिविधि के दौरान बच्चों को बताया गया कि चंद्रमा पर गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी की तुलना में काफी कम होता है। यह सुनते ही छात्रा अल्फीसा उत्साहित होकर बोली कि चांद पर उसका वजन केवल छह किलो रह जाएगा। वहीं जीरो ग्रैविटी के दृश्य देखकर छात्रा शगुन ने कहा कि उसे ऐसा महसूस हो रहा है जैसे वह अंतरिक्ष में तैर रही हो।मंगल ग्रह पर पानी और जीवन की संभावनाओं से जुड़ी जानकारी के दौरान छात्रा अंकिता लगातार सवाल पूछती रही। वहीं स्पेस सूट और अंतरिक्षीय दबाव से जुड़े वीडियो ने छात्रा आस्था और दीपाली सहित कई बच्चों में विशेष जिज्ञासा पैदा की। बच्चों को यह भी बताया गया कि पहला इंसान चंद्रमा तक कैसे पहुंचा, अंतरिक्ष में शरीर हल्का क्यों महसूस करता है और मंगल मिशन किस प्रकार संचालित होते हैं।कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि बच्चों ने अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी जानकारियों का डेटा भी संग्रहीत किया तथा बाद में समूहों में अपने विचार उत्साहपूर्वक साझा किए। गतिविधि की तस्वीरों में बच्चों का उत्साह स्पष्ट दिखाई दिया। कहीं बच्चे हाथ उठाकर सवाल पूछते नजर आए, तो कहीं वे “आओ अंतरिक्ष की सैर करें” विषयक पोस्टर और विद्यालय की तख्तियां लिए गतिविधि में शामिल दिखे। पूरे समय बच्चों के चेहरे पर जिज्ञासा और वैज्ञानिक सोच साफ दिखाई देती रही।विद्यालय के शिक्षक प्रदीप कुमार वर्मा ने कहा कि बच्चों के साथ “ऊंची उड़ान” उड़ने का अनुभव बेहद आनंददायक रहा। उन्होंने कहा कि जब बच्चे विज्ञान को देखकर, सुनकर और महसूस करके सीखते हैं, तब उनकी कल्पनाशक्ति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण स्वतः विकसित होता है। विद्यालय परिवार ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़ने के लिए ऐसे नवाचारी प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।

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