
15 वर्षों बाद रोजगार बहाली की उम्मीद; ‘सिंडिकेट कब्जे’ की आशंका पर संघ ने प्रशासन से सुरक्षा की मांग की
सुनील चिंचोलकर
बिलासपुर, छत्तीसगढ़। उसलापुर रेलवे गुड्स शेड में लंबे समय बाद कार्य प्रारंभ होने की संभावनाओं ने जहां स्थानीय ट्रक मालिकों और श्रमिकों में उम्मीद जगाई है, वहीं बाहरी तत्वों के हस्तक्षेप और संभावित ‘सिंडिकेट कब्जे’ की आशंका ने चिंता और आक्रोश भी पैदा कर दिया है। ‘उसलापुर गुड्स शेड वेलफेयर ट्रक ओनर एसोसिएशन’ ने कार्य शुरू होने की खबर का स्वागत करते हुए स्पष्ट किया है कि स्थानीय लोगों के अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संघ के अनुसार, करीब 15 वर्षों से बंद पड़े इस गुड्स शेड में पहले सीमेंट, चावल और अन्य खाद्य सामग्री की लोडिंग-अनलोडिंग का कार्य नियमित रूप से होता था। कार्य बंद होने से सैकड़ों मजदूरों और ट्रक मालिकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था। संघ ने आशंका जताई है कि तारबाहर गुड्स शेड से जुड़े कुछ प्रभावशाली ट्रांसपोर्टर उसलापुर साइडिंग पर अपना वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश कर सकते हैं। इसके साथ ही प्रशासनिक मिलीभगत की भी संभावना जताई गई है, जिससे स्थानीय श्रमिकों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर उसलापुर गुड्स शेड में संघ की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आने वाले समय की रणनीति और संभावित चुनौतियों पर चर्चा की गई। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से रोजगार चाहते हैं, लेकिन यदि बाहरी हस्तक्षेप से विवाद की स्थिति बनती है तो इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। इस संबंध में संघ ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जिला कलेक्टर और रेलवे प्रशासन को पत्र लिखकर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की मांग की है। बैठक में ईश्वर सिंह चंदेल, गुरमीत सिंह राणा, राशिद अली, जीत सिंह, लेबर अध्यक्ष राजेश टंडन, बलजीत सिंह डोम्मीर, महावीर सिंह संधू, हरजिंदर सिंह फौजी, इम्तियाज अली, इस्माइल भाई, शाहनवाज, संजू सिंह (MIC सदस्य), मुन्ना सिंह, मनजीत सिंह, विनोद पांडे, अस्सलाम, मुमताज खान सहित लगभग 200 ट्रक मालिक उपस्थित रहे।




