
ठाणे। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को हुए आतंकी हमले में डोंबिवली निवासी संजय लेले की मौत से पूरा लेले परिवार शोक में डूब गया है। संजय के साथ यात्रा पर गया उनका बेटा हर्षल इस भयावह हमले में चमत्कारिक रूप से बच गया, हालांकि उसे उंगली में गोली लगी है। परिजनों ने बताया कि संजय और हर्षल अपने कुछ परिचितों के साथ कश्मीर घूमने गए थे। हमले की खबर जब टीवी पर चली, तो लेले परिवार पर जैसे बिजली गिर पड़ी। एक चचेरे भाई ने बताया, “हम घर पर खाना खा रहे थे और टीवी पर अचानक संजय की तस्वीर देखी। यकीन नहीं हुआ कि वो हमारे संजय हैं। संजय लेले को उनके रिश्तेदारों के बीच हमेशा एक मजबूत स्तंभ की तरह देखा जाता था। डोंबिवली की एक इमारत में वे अपने चचेरे भाइयों के साथ पले-बढ़े थे। उनके रिश्ते सिर्फ खून के नहीं, भावनाओं के भी बेहद गहरे थे। एक रिश्तेदार ने भावुक होते हुए कहा, “वह रक्षाबंधन और भाई दूज कभी नहीं भूलते थे। हर त्योहार पर वह सगे भाई की तरह साथ निभाते थे। लेले परिवार के लिए यह दुःख और भी भारी इसलिए है क्योंकि कोविड-19 महामारी के दौरान संजय ने अपने पिता को खोया था और लॉकडाउन के कारण अंतिम संस्कार तक नहीं कर सके थे। एक पड़ोसी ने बताया, “उस समय वह हमारे सामने रोया था, कह रहा था कि कितना बेबस महसूस कर रहा है। और अब, किस्मत ने फिर से उसे छला है। हमले से कुछ दिन पहले ही संजय अपने पड़ोसियों से मिलकर यात्रा की योजनाएं साझा कर रहे थे। एक पड़ोसी ने कहा, “वो बहुत खुश थे। कह रहे थे कि लौटकर सबको फोटो दिखाएंगे। किसे पता था कि वह आखिरी मुलाकात होगी।”
संजय की मौत से पूरा परिवार टूट चुका है, खासकर उनकी बहन जो इस त्रासदी को स्वीकार ही नहीं कर पा रही हैं। यह हमला जहां देश को झकझोर गया है, वहीं लेले परिवार के लिए यह एक व्यक्तिगत और असहनीय क्षति बन गया है।




