Sunday, May 10, 2026
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महाराष्ट्र में चोरी का बढ़ता ग्राफ: 1,098 करोड़ रुपए की संपत्ति चोरी, बरामदगी सिर्फ 31 प्रतिशत

मुंबई। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2024 रिपोर्ट ने महाराष्ट्र में बढ़ते संपत्ति संबंधी अपराधों को लेकर गंभीर तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में राज्यभर में चोरी, सेंधमारी, चेन स्नैचिंग और वाहन चोरी जैसी वारदातों के जरिए कुल 1,098 करोड़ रुपए की संपत्ति चोरी हुई। हालांकि पुलिस केवल 342 करोड़ रुपए की संपत्ति ही बरामद कर सकी, जिससे रिकवरी रेट महज 31 प्रतिशत रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2022 से 2024 के बीच महाराष्ट्र में लगभग 3,068 करोड़ रुपए की संपत्ति चोरी का शिकार हुई। यह आंकड़ा राज्य में कानून-व्यवस्था और शहरी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं खड़ी करता है।
NCRB के अनुसार, पूरे देश में वर्ष 2024 के दौरान 5,924 करोड़ रुपए की संपत्ति चोरी हुई, जिसमें से करीब 2,073 करोड़ रुपए की संपत्ति बरामद की जा सकी। अकेले महाराष्ट्र में 81,741 शिकायतों के आधार पर चोरी से जुड़े 80,620 मामले दर्ज किए गए। इनमें 1,286 सेंधमारी, 26,512 वाहन चोरी और 714 चेन स्नैचिंग की घटनाएं शामिल हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2023 में महाराष्ट्र में चोरी हुई संपत्ति का मूल्य 1,029.7 करोड़ रुपए था, जो 2024 में बढ़कर 1,098 करोड़ रुपए पहुंच गया। यानी अपराध नियंत्रण के प्रयासों के बावजूद चोरी की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। देशभर में अपराधियों का सबसे बड़ा निशाना रिहायशी इलाके बने हुए हैं। NCRB रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे भारत में घरों और आवासीय क्षेत्रों से चोरी के 1,96,279 मामले सामने आए, जिनसे 1,378.3 करोड़ रुपए की संपत्ति का नुकसान हुआ। वहीं सड़कें और सार्वजनिक स्थान दूसरे सबसे संवेदनशील क्षेत्र रहे, जहां 1,73,835 चोरी की घटनाओं में लगभग 809 करोड़ रुपए का नुकसान दर्ज किया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अपराधी अब घनी आबादी वाले शहरी इलाकों और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों को अधिक निशाना बना रहे हैं, क्योंकि वहां चोरी के बाद संपत्ति का पता लगाना कठिन हो जाता है। रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन, मॉल, एयरपोर्ट, औद्योगिक क्षेत्र, कार्यालय, शिक्षण संस्थान, बैंक और एटीएम भी अपराधियों के निशाने पर रहे। चोरी हुई संपत्ति के मूल्य के मामले में महाराष्ट्र देश में पहले स्थान पर रहा, जबकि कर्नाटक 484.4 करोड़ रुपए के नुकसान के साथ दूसरे और राजस्थान 429.5 करोड़ रुपए के नुकसान के साथ तीसरे स्थान पर रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते शहरीकरण, संगठित अपराध गिरोहों की सक्रियता और निगरानी तंत्र की सीमाओं के कारण चोरी की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। रिपोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि रिहायशी और सार्वजनिक क्षेत्रों में मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, आधुनिक निगरानी नेटवर्क और नागरिक जागरूकता बढ़ाना अब बेहद जरूरी हो गया है।

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