HomeReligionराम मंदिर दान विवाद: बिना एफआईआर गठित हुई एसआईटी, निष्पक्ष जांच पर...

राम मंदिर दान विवाद: बिना एफआईआर गठित हुई एसआईटी, निष्पक्ष जांच पर उठे सवाल

अयोध्या, उत्तर प्रदेश। अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान और कीमती सामान के कथित दुरुपयोग के आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी जांच शुरू कर दी है। हालांकि, मामले में अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं होने के कारण जांच की निष्पक्षता और प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी की अध्यक्षता संभागीय आयुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं, जबकि पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन इसके सदस्य हैं। टीम ने अयोध्या के आयुक्त और जिलाधिकारी के साथ राम मंदिर परिसर का दौरा कर जांच प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। सरकार ने एसआईटी को सात दिनों में प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मंदिर में चढ़ाए गए दान और बहुमूल्य वस्तुओं के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद यह जांच शुरू की गई है। हालांकि अभी तक किसी भी एजेंसी ने आरोपों की पुष्टि नहीं की है और न ही किसी व्यक्ति को दोषी ठहराया गया है। इसी बीच, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने कहा है कि जांच में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और जिला प्रशासन तथा मंदिर प्रशासन एसआईटी को पूरा सहयोग देगा। दूसरी ओर, इस मामले ने कानूनी मोड़ भी ले लिया है। अधिवक्ता अनूप प्रकाश अवस्थी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि केवल एसआईटी का गठन पर्याप्त नहीं है। याचिका में मांग की गई है कि मामले की जांच सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए और उसकी निगरानी सर्वोच्च न्यायालय स्वयं करे। याचिका में कहा गया है कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और दान राशि के कथित दुरुपयोग के आरोपों ने देश और विदेश में बसे भक्तों के बीच चिंता पैदा की है। याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया है कि बिना एफआईआर केवल एसआईटी गठित कर देना कई लोगों के मन में यह आशंका पैदा कर रहा है कि कहीं मामला प्रशासनिक फाइलों तक सीमित न रह जाए। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि प्रारंभिक जांच के लिए एफआईआर दर्ज होना अनिवार्य नहीं है, लेकिन यदि जांच के दौरान किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, गबन या आपराधिक कृत्य के प्रमाण मिलते हैं, तो एफआईआर दर्ज कर आगे की आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितना दम है और क्या मामले में किसी आपराधिक जांच की आवश्यकता है। वहीं श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों की मांग है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी हो तथा उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि मंदिर में दान देने वाले करोड़ों लोगों का विश्वास कायम रह सके।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments