
मुंबई। तेजी से बदलते सूचना और प्रौद्योगिकी के दौर में पत्रकारिता के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) बड़े बदलाव ला रही है और इसे अवसर के रूप में अपनाते हुए महिला पत्रकारों को तकनीक-समर्थ बनना चाहिए। यह विश्वास सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के प्रधान सचिव एवं महानिदेशक ब्रिजेश सिंह ने व्यक्त किया। सोमवार को राष्ट्रीय महिला आयोग और सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशालय महाराष्ट्र के संयुक्त तत्वावधान में यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान के रंगस्वर सभागार में आयोजित “महिला, मीडिया और प्रौद्योगिकी” विषयक कार्यशाला में ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता और पत्रकारिता पर उसका प्रभाव’ विषय पर बोलते हुए उन्होंने यह बात कही। इस अवसर पर विजया रहाटकर, नंदिनी आवड़े, डॉ. रिचा सूद और डॉ. स्वाती गुप्ता सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।ब्रिजेश सिंह ने कहा कि एआई तकनीक मानवीय संदर्भों पर आधारित होती है, इसलिए इसमें त्रुटि की संभावना बनी रहती है। ऐसे में पत्रकारिता में एआई का उपयोग करते समय तथ्यों और संदर्भों की शुद्धता सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि राजनीतिक, मनोरंजन और अपराध जैसे विभिन्न क्षेत्रों में रिपोर्टिंग के दौरान एआई महिला पत्रकारों के लिए एक उपयोगी साधन साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि एआई केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि पत्रकारिता की गति बढ़ाने वाला एक शक्तिशाली उपकरण है। सूचना संग्रह, अनुवाद और विभिन्न प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुति में एआई के उपयोग से कार्य की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। इससे समय की बचत होती है, जिससे पत्रकारों को विश्लेषणात्मक और अनुसंधानात्मक कार्यों के लिए अधिक समय मिल पाता है। ब्रिजेश सिंह ने महिला पत्रकारों से अपील की कि वे बदलते समय के साथ तालमेल बैठाते हुए एआई टूल्स का उपयोग करें और तकनीकी कौशल विकसित करें, ताकि वे पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान बना सकें। उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग से महिला पत्रकारों के लिए एआई कौशल प्रशिक्षण शुरू करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी भाषा की बाधा को दूर करने के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में एआई का उपयोग बढ़ाना आवश्यक है। ‘सर्वम’ जैसे इंडिक एआई टूल्स के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की खबरों को स्थानीय भाषा में सीधे लोगों तक पहुंचाना आसान होगा, जिससे भाषा की बाधा समाप्त होगी और सूचना अधिक सुलभ बनेगी। कार्यशाला के दौरान उन्होंने विभाग के डिजिटल उपक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि एआई के माध्यम से सटीक समाचारों का तेज प्रसारण किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने एआई के उपयोग में नैतिक आचार संहिता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यूरोप की तर्ज पर भारत में भी ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।




