Tuesday, April 21, 2026
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सत्ता की हनक या विश्वासघात! भाजपा नेता लक्ष्मण जंगम पर रेप और धमकी का केस दर्ज

मीरा-भाईंदर। महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है, जहां ठाणे जिले के मीरा-भाईंदर क्षेत्र में भाजपा के पूर्व नगरसेवक लक्ष्मण जंगम के खिलाफ यौन उत्पीड़न, धोखाधड़ी और धमकी जैसे संगीन आरोपों में मामला दर्ज होने से सियासी और सामाजिक हलकों में हड़कंप मच गया है। यह मामला केवल एक आपराधिक शिकायत भर नहीं, बल्कि सत्ता, भरोसे और कथित दुरुपयोग की उस जटिल संरचना को उजागर करता है, जिसमें ताकतवर पदों पर बैठे लोगों पर अक्सर गंभीर आरोप लगते रहे हैं। पीड़ित महिला के अनुसार, जुलाई 2022 में आरोपी ने उसे मीरा रोड (पूर्व) स्थित अपने कार्यालय में बुलाया, जहां शादी का वादा कर उसे विश्वास में लिया गया और उसी भरोसे का फायदा उठाते हुए उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए गए। महिला का दावा है कि यह सिलसिला एक बार की घटना नहीं बल्कि लगभग दो वर्षों तक चलता रहा, और जब भी उसने विवाह का दबाव बनाया, उसे कथित रूप से धमकाया गया और चुप रहने के लिए मजबूर किया गया। मामले में पुलिस की शुरुआती भूमिका भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर यह चर्चा रही कि प्रारंभिक शिकायतों पर अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई गई, जिससे राजनीतिक दबाव की आशंकाओं को बल मिला; हालांकि मामला सार्वजनिक होने और बढ़ते सामाजिक-राजनीतिक दबाव के बाद मीरा रोड पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69, जो शादी के झूठे वादे के आधार पर संबंध बनाने से जुड़ी है, और धारा 351(2), जो आपराधिक धमकी से संबंधित है, के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। इन धाराओं के तहत दोष सिद्ध होने पर कड़ी सजा का प्रावधान है, जिससे आरोपी की कानूनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इस घटना ने राजनीतिक माहौल को भी गरमा दिया है, जहां विपक्ष सत्ताधारी दल की नैतिकता और महिला सुरक्षा के दावों पर सवाल उठा रहा है, वहीं स्थानीय नागरिकों में भी आक्रोश देखा जा रहा है और यह मुद्दा आने वाले चुनावों में राजनीतिक प्रभाव डाल सकता है। फिलहाल पुलिस जांच जारी है, साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और पीड़िता के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है कि क्या यह मामला निष्पक्ष जांच के साथ न्याय तक पहुंचेगा या फिर सत्ता और प्रभाव के दबाव में इसकी दिशा बदल जाएगी; यह प्रकरण केवल एक व्यक्ति पर लगे आरोपों तक सीमित नहीं, बल्कि उस व्यापक व्यवस्था की भी परीक्षा है, जहां कानून और सत्ता के बीच संतुलन की असली कसौटी सामने आती है।

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