
सीएम फडणवीस ने कहा- केंद्रीय कानूनों के अनुरूप बने राज्य की नियमावली, घरेलू और असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए तैयार हों योजनाएं
मुंबई। महाराष्ट्र में कामगारों से जुड़े विभिन्न कानूनों में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कानूनों में प्रस्तावित सुधारों के दौरान व्यापक कामगार हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। केंद्रीय कामगार कानूनों के अनुरूप राज्य की नियमावली तैयार करते समय महाराष्ट्र के हित में आवश्यक बदलाव किए जाने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिए हैं। वर्षा निवासस्थान पर आयोजित कामगार कानून सुधारों की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री फडणवीस ने प्रस्तावित प्रावधानों की बारीकी से जांच के बाद ही निर्णय लेने को कहा। सोमवार को मुख्यमंत्री फडणवीस ने कामगार न्यायालयों के स्थान पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी से संबंधित प्रस्तावित प्रावधान की समीक्षा करने के निर्देश देते हुए कामगारों से जुड़े लंबित मामलों की जिलेवार रिपोर्ट पेश करने को कहा। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि कामगारों से संबंधित मामलों के निपटारे का अतिरिक्त दबाव मुख्य न्यायिक दंडाधिकारियों पर न पड़े। महाराष्ट्र माथाडी, हमाल एवं अन्य श्रमजीवी कामगार कानून में सुधार के दौरान निर्माण क्षेत्र के कामगारों की दोहरी सदस्यता रोकने के लिए उन्हें निर्माण कामगार कल्याण मंडल अथवा माथाडी मंडल में से किसी एक की सदस्यता देने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए केंद्र के नए कामगार कानूनों के प्रावधानों के अनुरूप प्रत्येक वर्ग के लिए अलग योजनाएं तैयार करने और इनमें घरेलू कामगारों को भी शामिल करने के निर्देश दिए। प्रस्तावित कामगार कानून सुधारों को मंत्रिमंडल के समक्ष पेश किया जाएगा। बैठक में कामगार मंत्री आकाश फुंडकर उपस्थित थे, जबकि कामगार राज्यमंत्री आशीष जयस्वाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हिस्सा लिया। बैठक में महाराष्ट्र माथाडी, हमाल एवं श्रमजीवी (नौकरी का नियमन एवं कल्याण) अधिनियम, 1969 और महाराष्ट्र निजी सुरक्षा रक्षक (नौकरी का नियमन एवं कल्याण) अधिनियम, 1981 में भारतीय न्याय संहिता तथा केंद्र के चार नए कामगार कानूनों के अनुरूप किए जा रहे सुधारों का प्रस्तुतीकरण किया गया।



