
मुंबई। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने कहा है कि कैंसर के खिलाफ लड़ाई में सरकारी तंत्र के साथ-साथ निजी कैंसर अस्पतालों, कैंसर विशेषज्ञों और सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। शनिवार को मुंबई स्थित स्वास्थ्य सेवा आयुक्तालय में स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में वरिष्ठ मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, ऑन्को सर्जन, विशेषज्ञ प्राध्यापक, कैंसर उपचार क्षेत्र में कार्यरत टाटा मेमोरियल सेंटर, रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल, लीलावती हॉस्पिटल सहित अन्य निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि, सरकारी एवं निजी अस्पतालों के कैंसर विशेषज्ञ, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा दक्षिण कोरिया की आईएमबी संस्था के विशेषज्ञ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। बैठक में सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव डॉ. निपुण विनायक, स्वास्थ्य सेवा आयुक्त डॉ. कादंबरी बलकवडे, शहरी स्वास्थ्य आयुक्त सुनील भोकरे और उप सचिव विलास बेंद्रे भी उपस्थित थे। स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने कहा कि राज्य में कैंसर मरीजों की संख्या बढ़ रही है और कैंसर के उपचार में शुरुआती चरण में पहचान यानी अर्ली डिटेक्शन अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि बीमारी प्रारंभिक अवस्था में पकड़ में आ जाए तो मरीज के ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसी उद्देश्य से राज्यभर में जनजागरण, जांच और उपचार की त्रिस्तरीय रणनीति के आधार पर कैंसर के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कैंसर जांच के लिए राज्य के आठ परिमंडलों में कैंसर निदान वैन के माध्यम से जांच अभियान चलाया जा रहा है और अब तक तीन करोड़ से अधिक नागरिकों की जांच की जा चुकी है। साथ ही कैंसर मरीजों के उपचार के लिए राज्य में 27 स्थानों पर डे-केयर यूनिट शुरू किए जा रहे हैं। राज्य में 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की बालिकाओं के लिए एचपीवी टीकाकरण अभियान भी शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की रोकथाम करना है। कैंसर उपचार को अधिक प्रभावी बनाने के लिए महात्मा फुले जनआरोग्य योजना के अंतर्गत उपचार पैकेज की समीक्षा की गई है और रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी तथा पीईटी स्कैन जैसी सुविधाओं को व्यापक रूप से शामिल करने की योजना बनाई जा रही है। इसके अलावा “महाराष्ट्र कैंसर वॉरियर्स (एमसीडबल्यू)” पहल के माध्यम से विशेषज्ञ ऑन्कोलॉजिस्ट की सहायता से मरीजों को निदान और उपचार सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। बैठक में दक्षिण कोरिया की आईएमबी संस्था द्वारा लिक्विड बायोप्सी तकनीक पर प्रस्तुतीकरण भी दिया गया। यह तकनीक दुनिया के कई देशों में विभिन्न प्रकार के कैंसर के शुरुआती और सटीक निदान के लिए उपयोग की जा रही है। विशेषज्ञों ने इस तकनीक के उपयोग पर मार्गदर्शन देने की आवश्यकता पर बल दिया। स्वास्थ्य मंत्री आबिटकर ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग, निजी अस्पताल, विशेषज्ञ डॉक्टर और सामाजिक संस्थाएं मिलकर कार्य करें तो कैंसर उन्मूलन का लक्ष्य निश्चित रूप से हासिल किया जा सकता है।




