
वी. बी. माणिक
मुंबई। बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) प्रशासन मंगलवार, 25 मार्च से नाला सफाई महोत्सव शुरू करने जा रहा है। मुंबई के छोटे-बड़े सभी नालों की सफाई का काम 23 ठेकेदारों को सौंपा गया है। अगले सप्ताह से मीठी नदी की सफाई भी शुरू हो जाएगी। इस बार सफाई प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी और प्रत्येक स्थल पर एक अभियंता पूर्ण समय ड्यूटी पर तैनात रहेगा। साथ ही, सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जाएगी। हालांकि, सवाल उठता है कि क्या इस बार घपलेबाजी और हफ्ताखोरी पर रोक लग पाएगी? हर साल करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद बारिश के दौरान मुंबई जलमग्न हो जाती है। क्या इस बार सफाई कार्य में पारदर्शिता आएगी? क्या अभियंताओं और ठेकेदारों पर नकेल कसने के लिए कोई ठोस योजना बनाई गई है? यदि वे लापरवाही करते हैं तो क्या उन्हें निलंबित कर नुकसान की भरपाई कराई जाएगी? हर साल अप्रैल के आखिरी सप्ताह में नाला सफाई का काम शुरू होता है। इसके लिए मनपा रेल प्रशासन को लगभग तीन करोड़ रुपये देती है, फिर भी सफाई अधूरी रह जाती है। जनता के पैसों का खुला दुरुपयोग होता है, अधिकारी और नेता केवल अपनी जेबें भरते हैं। इस बार अतिरिक्त आयुक्त और उपायुक्त की जिम्मेदारी तय होगी या फिर यह अभियान भी सिर्फ दिखावा बनकर रह जाएगा? नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा? क्या इस बार बारिश में मुंबई डूबने से बच पाएगी? ये सवाल हर मुंबईकर के मन में उठ रहे हैं।




