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डॉ. सेजल पवार की टिप्पणी पर भड़कीं मुंबई की मेयर रितु तावड़े, स्टैंड-अप कॉमेडी शो पर प्रतिबंध की मांग

मुंबई। कॉमेडियन प्रणित मोरे के स्टैंड-अप कॉमेडी शो के दौरान डॉ.सेजल पवार द्वारा की गई कथित टिप्पणियों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इसी बीच मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग बताया है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज और युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं तथा इस प्रकार के स्टैंड-अप कॉमेडी शो पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता है। मेयर ने कहा कि वह इस पूरे मामले को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखेंगी और संबंधित कार्यक्रमों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करेंगी। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन इस अधिकार का उपयोग जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए। रितु तावड़े ने कहा, “मुंबई की मेयर होने के नाते मैं इस तरह की टिप्पणियों का पूर्णतः विरोध करती हूं। आजकल कुछ स्टैंड-अप कॉमेडी शो युवाओं को गलत दिशा में ले जाने का काम कर रहे हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी विषय पर असंवेदनशील या अपमानजनक टिप्पणी करे। जिस प्रकार की भाषा और विचार प्रस्तुत किए जा रहे हैं, वे स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने विशेष रूप से मेडिकल शिक्षा के दौरान अध्ययन के लिए उपयोग किए जाने वाले शवों पर की गई कथित टिप्पणियों को लेकर नाराजगी जताई। मेयर ने कहा कि परिवार अपने प्रियजनों के शव मेडिकल संस्थानों को इस विश्वास के साथ दान करते हैं कि उनसे भविष्य के डॉक्टर शिक्षा प्राप्त करेंगे और समाज की सेवा करेंगे। ऐसे में उन शवों के बारे में मजाकिया या अपमानजनक टिप्पणियां करना न केवल असंवेदनशील है बल्कि उन परिवारों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाता है। उन्होंने कहा- जो परिवार अपने किसी प्रियजन को खोने के बाद भी समाजहित में उनका शरीर दान करते हैं, वे सम्मान और विश्वास के साथ ऐसा करते हैं। ऐसे पवित्र उद्देश्य से दान किए गए शवों के बारे में आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करना पूरी तरह गलत है। मेयर ने यह भी कहा कि मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को समाज के प्रति अधिक संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने के लिए भारी आर्थिक और व्यक्तिगत त्याग करते हैं। ऐसे में प्रतिष्ठित संस्थानों में अध्ययन कर रहे छात्रों से अधिक जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। रितु तावड़े ने कहा कि इस प्रकार की टिप्पणियां भारतीय संस्कृति और महाराष्ट्र की सामाजिक परंपराओं के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने चिंता जताई कि मनोरंजन के नाम पर मर्यादा और संवेदनशीलता की सीमाएं लगातार कमजोर होती जा रही हैं। गौरतलब है कि प्रणित मोरे के स्टैंड-अप शो के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद शुरू हुआ था। इनमें दर्शकों के साथ हुई बातचीत तथा मेडिकल शिक्षा से जुड़े कुछ कथित मजाकों को लेकर सोशल मीडिया पर व्यापक आलोचना हुई। इसके बाद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, हास्य की सीमाएं, सामाजिक जिम्मेदारी और चिकित्सा शिक्षा में उपयोग होने वाले मानव अवशेषों के प्रति सम्मान जैसे मुद्दों पर बहस तेज हो गई है। मेयर की इस मांग ने अब विवाद को एक नया राजनीतिक और सामाजिक आयाम दे दिया है। हालांकि, स्टैंड-अप कॉमेडी पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग को लेकर भी विभिन्न वर्गों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है, क्योंकि यह मुद्दा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक जवाबदेही के बीच संतुलन से जुड़ा हुआ है।

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