Friday, May 22, 2026
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मणिकर्णिका वूमेंस क्लब ने जीवंत किया इतिहास, रानी लक्ष्मीबाई-विवाह समारोह का भव्य मंचन

झांसी, उत्तर प्रदेश। झांसी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से मणिकर्णिका वूमेंस क्लब द्वारा एक भव्य एवं ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष आयोजन में वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई और महाराजा गंगाधर राव के विवाह समारोह का मंचन पारंपरिक रीति-रिवाजों और वैदिक विधानों के साथ किया गया, जिसने उपस्थित लोगों को इतिहास के स्वर्णिम युग की अनुभूति करा दी।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद महारानी लक्ष्मीबाई की भूमिका में क्लब प्रेसिडेंट ओमनी राय तथा महाराजा गंगाधर राव की भूमिका में कविता पांडे ने विवाह समारोह की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। समारोह में मेहंदी, बारात स्वागत, जयमाला, कन्यादान सहित सभी वैवाहिक रस्में भारतीय परंपरा के अनुरूप संपन्न कराई गईं। पारंपरिक संगीत, सांस्कृतिक उल्लास और ऐतिहासिक गौरव से सजा पूरा वातावरण लोगों को भावविभोर करता रहा।आयोजकों ने बताया कि झांसी में इस प्रकार का आयोजन पहली बार किया गया है, जिसका उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि युवाओं को भारतीय इतिहास, संस्कृति और रानी लक्ष्मीबाई के त्याग, शौर्य एवं सम्मान से जोड़ना है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इसे झांसी की सांस्कृतिक चेतना और गौरवशाली इतिहास का जीवंत उदाहरण बताया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सुनीता शर्मा उपस्थित रहीं, जबकि रविका खरे एवं ईशा अरोरा विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं। आयोजन को सफल बनाने में क्लब की चार्टर प्रेसिडेंट सपना सरावगी, प्रेसिडेंट ओमनी राय, वाइस प्रेसिडेंट नूपुर अग्रवाल, ट्रेजरार तमन्ना राय तथा सेक्रेटरी संयुक्त शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन प्रोग्राम डायरेक्टर राखी मिश्रा और कविता पांडे द्वारा किया गया। वरिष्ठ सदस्य अंजलि अग्रवाल एवं दर्शना सोनी सहित क्लब की सदस्य नीलू नरवानी, रूपम शर्मा, प्रेरणा सहवानी, सिमरित जिज्ञासी, स्वाति अग्रवाल, तनु अग्रवाल, प्रियंका पारीक्षा, ज्योत्सना, संचिता अग्रवाल, पूनम गुप्ता, नीलम, कमलेश कुशवाहा एवं भुवनेंद्रु ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय सहभागिता निभाई।यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि झांसी की ऐतिहासिक अस्मिता, नारी शक्ति और भारतीय संस्कारों के सम्मान का जीवंत उत्सव बन गया।

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