
उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव नगर स्थित स्टेशन रोड चौराहा पर सुरेंद्र प्रधान के हाता में Shrimad Bhagwat Parivar Seva Prakalp Ram Katha के तत्वावधान में आयोजित श्री राम कथा के तृतीय दिवस मानस मर्मज्ञ आचार्य ओम जी मिश्रा ने नारद मोह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालु भक्तों को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। कथा की अध्यक्षता विख्यात संत Swami Ramswaroop Brahmachari ने की।आचार्य ओम जी मिश्रा ने कथा के दौरान कहा कि यह मानव शरीर सहित संसार के सभी साधन नश्वर हैं, इसलिए मनुष्य को अपने पद, प्रतिष्ठा, धन और वैभव का कभी अभिमान नहीं करना चाहिए। उन्होंने नारद मोह प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि ऋषि नारद को यह अहंकार हो गया था कि वे भगवान विष्णु के सबसे बड़े भक्त हैं। भक्त के कल्याण के लिए भगवान विष्णु ने मां लक्ष्मी के स्वयंवर की अद्भुत लीला रची और नारद मुनि का रूप विकृत कर दिया। परिणामस्वरूप माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु के गले में वरमाला डाल दी और तभी नारद मुनि का मोह भंग हुआ।कथा के दौरान आचार्य ने कहा कि काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार मानव जीवन के पांच महाशत्रु हैं। इन विकारों पर विजय प्राप्त करने वाला व्यक्ति ही परमपिता परमात्मा का सानिध्य प्राप्त कर सकता है। उन्होंने भगवान शंकर और माता पार्वती के विवाह प्रसंग का भी अत्यंत सरस वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भक्त भावविभोर हो उठे।कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे वातावरण में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का माहौल बना रहा।




