
महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे के निर्देश; 874 बच्चों के नाम पर 5-5 लाख रुपये की एफडी, 103 लाभार्थियों को राशि मिली
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार कोविड-19 महामारी के कारण अनाथ हुए बच्चों को बड़ी राहत देने की तैयारी कर रही है। बुधवार को महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने ऐसे बच्चों के लिए बालगृह में रहने की अधिकतम आयु सीमा 21 वर्ष से बढ़ाकर 23 वर्ष करने का प्रस्ताव तत्काल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह सुविधा उन बच्चों के लिए होगी, जिनके माता-पिता की कोविड से मृत्यु हो गई और जिनकी देखभाल के लिए परिवार या रिश्तेदार आगे नहीं आए। बुधवार को मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री तटकरे ने बताया कि राज्य सरकार ने कोविड के कारण अनाथ हुए 874 पात्र बच्चों के नाम पर प्रत्येक के लिए 5 लाख रुपये की सावधि जमा (एफडी) कराई है। वहीं, 21 वर्ष की आयु पूरी कर चुके 103 लाभार्थियों को यह राशि वितरित भी की जा चुकी है। सरकार अब इन बच्चों को 23 वर्ष की आयु तक बालगृह में रहने की सुविधा देने के लिए सकारात्मक है। उन्होंने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कोविड-19 के कारण अनाथ हुए और जिनकी देखभाल रिश्तेदार नहीं कर सकते, ऐसे बच्चों के लिए विशेष बाल संरक्षण योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से उनके नाम पर 5 लाख रुपये की एफडी की गई है। राज्य में बच्चों की देखभाल और संरक्षण के लिए वर्तमान में 545 संस्थाएं कार्यरत हैं, जिनमें 63 सरकारी और 482 स्वयंसेवी संस्थाएं शामिल हैं। इनमें खुले आश्रय गृह, निरीक्षण गृह, विशेष गृह, सुरक्षित स्थान, बालगृह, एचआईवी प्रभावित बच्चों के लिए बालगृह, विशेष दत्तक गृह तथा अनुरक्षण गृह जैसी कुल नौ प्रकार की संस्थाएं संचालित की जा रही हैं। बैठक में बाल न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। इसके अनुसार, 6 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को बालगृह तथा 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों को विशेष दत्तक गृह में रखा जाता है। सरकार ने इन संस्थाओं की कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया।



