Saturday, April 25, 2026
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भटके-विमुक्त समाज के लिए बड़ी पहल: अत्याचार रोकने और विकास को गति देने हेतु त्रिस्तरीय समितियों का गठन

मुंबई। सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को मजबूत करने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार ने भटके-विमुक्त समाज के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस समुदाय की समस्याओं के त्वरित समाधान, अत्याचारों पर प्रभावी रोक और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के उद्देश्य से राज्य में त्रिस्तरीय समितियों का गठन किया गया है। इस संबंध में मंत्री अतुल सावे ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य, जिला और उपविभाग स्तर पर गठित ये समितियां समाज के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इन समितियों के माध्यम से भटके-विमुक्त समाज की शिकायतों का त्वरित निवारण, अत्याचार की घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई और शासकीय योजनाओं का प्रभावी लाभ सुनिश्चित किया जाएगा। राज्यस्तरीय समिति की अध्यक्षता मंत्री स्तर पर होगी, जबकि जिला स्तर पर जिलाधिकारी और उपविभाग स्तर पर उपविभागीय अधिकारी इसके प्रमुख होंगे। समितियों में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समाज के अशासकीय प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा, जिनमें महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य रखी गई है। समितियों की प्रमुख जिम्मेदारियों में अत्याचार के मामलों में तुरंत एफआईआर दर्ज कराना, पीड़ितों को चिकित्सा और कानूनी सहायता उपलब्ध कराना, तथा मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना शामिल है। इसके अलावा समाज में कानूनी जागरूकता बढ़ाने के लिए शिविर आयोजित किए जाएंगे। शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों का स्कूल में प्रवेश, शैक्षणिक योजनाओं का लाभ और उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहन भी इन समितियों की प्राथमिकताओं में रहेगा। इसके साथ ही स्वास्थ्य जांच, अंधश्रद्धा उन्मूलन, सामाजिक जागरूकता, और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने के लिए अभियान चलाए जाएंगे। भटके-विमुक्त समाज को सड़क, बिजली, पानी और आवास जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। रोजगारोन्मुख योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। समितियों की कार्यप्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। प्राप्त शिकायतों पर 10 दिनों के भीतर कार्रवाई शुरू करना अनिवार्य होगा। यदि जिला या उपविभाग स्तर पर समाधान नहीं होता, तो नागरिक राज्यस्तरीय समिति से संपर्क कर सकेंगे। साथ ही, जिला और उपविभाग स्तर पर वर्ष में कम से कम चार बैठकें आयोजित करना अनिवार्य किया गया है और कार्यों की नियमित रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी। सरकार का यह कदम भटके-विमुक्त समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ उन्हें न्याय और सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक मजबूत पहल माना जा रहा है।

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