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पुणे जहरीली शराब कांड के बाद एफ़डीए की बड़ी कार्रवाई, भिवंडी से 5,929 किलो मिथेनॉल जब्त

मुंबई। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के फुगेवाड़ी, दापोडी और हडपसर क्षेत्रों में जहरीली देशी शराब पीने से 18 लोगों की मौत के बाद महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफ़डीए) ने शुक्रवार रात बड़ी कार्रवाई करते हुए भिवंडी स्थित एक कंपनी पर छापा मारकर 5,929 किलोग्राम मिथेनॉल जब्त किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इसी जहरीले रसायन को शराब में मिलाए जाने के कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ। एफ़डीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था को बख्शा नहीं जाएगा। खाद्य एवं औषधि क्षेत्र में अवैध कारोबार, नकली और गैरकानूनी उत्पादों के निर्माण तथा बिक्री के खिलाफ कार्रवाई अब और अधिक सख्त तथा लगातार जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा अन्य संबंधित कानूनों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सीधे कानूनी और न्यायालयीन कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षित खाद्य पदार्थ और दवाएं हर नागरिक का मूलभूत अधिकार हैं और इसे सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि पुणे की जहरीली शराब में इस्तेमाल किया गया मिथेनॉल रेक्स इंटरनेशनल नामक कंपनी से प्राप्त किया गया था। कंपनी का कार्यालय वाशी में है, जबकि उसका गोदाम भिवंडी के अंजूर रोड स्थित म्हात्रे कंपाउंड में संचालित किया जा रहा था। जानकारी मिलते ही एफ़डीए आयुक्त तुकाराम मुंढे के निर्देश पर औषधि निरीक्षक योगेंद्र पोळ ने वहां छापा मारा। छापेमारी के दौरान कंपनी के मालिक अरुणकुमार चौबे और अधिकृत प्रतिनिधि अभिषेक अरुणकुमार चौबे मौजूद नहीं थे। जांच में पता चला कि उन्हें पहले ही राज्य उत्पाद शुल्क विभाग ने हिरासत में लिया हुआ है। गोदाम की तलाशी के दौरान वहां से 5,929 किलोग्राम मिथेनॉल का विशाल भंडार बरामद किया गया। सबसे गंभीर बात यह रही कि कंपनी के पास मिथेनॉल की खरीद-बिक्री से संबंधित कोई वैध रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर या आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। विषैले पदार्थों से संबंधित कानूनों के तहत आवश्यक जानकारी नहीं मिलने पर पूरे स्टॉक को जब्त कर लिया गया। साथ ही कंपनी के मालिक और अधिकृत प्रतिनिधि के खिलाफ भिवंडी के नारपोली पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया गया है। एफ़डीए ने कंपनी का लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। बता दें कि जहरीली शराब पीने वाले लोगों ने फुगेवाड़ी निवासी कर्नाल सिंह विरका के घर पर देशी शराब का सेवन किया था। विरका को यह शराब योगेश वानखेडे नामक व्यक्ति ने उपलब्ध कराई थी, जबकि योगेश को यह शराब उरळी कांचन निवासी राजू प्रजापति से मिली थी। जांच में सामने आया है कि इसी सप्लाई चेन के जरिए मिथेनॉल मिश्रित शराब लोगों तक पहुंची। एफ़डीए अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते यह कार्रवाई नहीं की जाती तो राज्य के अन्य हिस्सों में भी पुणे जैसी त्रासदी दोहराई जा सकती थी। इस छापेमारी ने अवैध शराब कारोबारियों और मिथेनॉल का अवैध भंडारण करने वाली कंपनियों के बीच संभावित संबंधों को उजागर कर दिया है।
नागरिकों से अपील: एफ़डीए ने नागरिकों से अपील की है कि वे अवैध दवाओं की बिक्री, दवाओं में मिलावट, भ्रामक विज्ञापनों या किसी भी संदिग्ध रासायनिक भंडारण की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें। शिकायत दर्ज कराने के लिए जल्द ही एक मोबाइल ऐप और टोल-फ्री हेल्पलाइन शुरू की जाएगी। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि प्राप्त होने वाली सभी शिकायतों की गोपनीय तरीके से जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुणे जहरीली शराब कांड के बाद एफ़डीए की यह कार्रवाई राज्य में स्वास्थ्य और जन सुरक्षा से जुड़े अपराधों के खिलाफ एक बड़े अभियान की शुरुआत मानी जा रही है।

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