
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में एप-आधारित यात्री परिवहन सेवाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए नया एग्रीगेटर नीति (Aggregator Policy) लागू कर दी है। अब ओला, उबर, रैपिडो जैसी कंपनियों को सरकार द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करते हुए ही संचालन करना होगा। गुरुवार को परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि नई नीति से यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, चालकों के आर्थिक हितों की रक्षा होगी, सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। सरकार के अनुसार अब राज्य में कार्यरत प्रत्येक एग्रीगेटर कंपनी को राज्य परिवहन प्राधिकरण से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। प्रत्येक कंपनी को अलग लाइसेंस पहचान संख्या दी जाएगी और निर्धारित शुल्क भी देना होगा। इसके साथ ही सरकार एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल विकसित करेगी, जिसके माध्यम से जीपीएस ट्रैकिंग, चालक सत्यापन और नियमों के उल्लंघन पर रियल टाइम निगरानी रखी जाएगी। नई नीति में यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रत्येक एग्रीगेटर कंपनी के लिए 24 घंटे कॉल सेंटर, शिकायत निवारण अधिकारी और निर्धारित समय सीमा में शिकायतों का समाधान करना अनिवार्य होगा। ड्राइवर के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस और बैज होना जरूरी होगा तथा उसे आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। लगातार 12 घंटे से अधिक वाहन चलाने की अनुमति नहीं होगी। यात्रियों को ड्राइवर की रेटिंग देने की सुविधा भी मिलेगी और चालक व यात्रियों के लिए बीमा सुरक्षा का प्रावधान किया गया है। चालकों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि कुल किराए का कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सा ड्राइवर को मिलेगा, जिससे अत्यधिक कमीशन वसूली पर रोक लगेगी। मनमानी किराया वसूली रोकने के लिए क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण मूल किराया तय करेगा। सर्ज प्राइसिंग पर सीमा तय की गई है और अत्यधिक छूट या अतिरिक्त किराया वसूलने पर नियंत्रण रहेगा। सुविधा शुल्क की भी अधिकतम सीमा निर्धारित की जाएगी, जिससे यात्रियों को पारदर्शी और उचित दरों पर सेवा मिल सकेगी। नई नीति के तहत किसी भी वाहन मालिक के पास एक ही ऐप प्लेटफॉर्म पर मुंबई, पुणे, नाशिक और नागपुर में अधिकतम 50 वाहन, जबकि राज्य के अन्य क्षेत्रों में 25 वाहन ही पंजीकृत किए जा सकेंगे। सरकार का कहना है कि इससे बड़े कारोबारी समूहों का एकाधिकार कम होगा और छोटे वाहन मालिकों को भी अवसर मिलेगा।
व्यावसायिक यात्री वाहनों के चालकों के लिए बैज अनिवार्य किया गया है। बैज प्राप्त करने के लिए महाराष्ट्र का निवासी होना तथा व्यावहारिक मराठी भाषा का ज्ञान आवश्यक होगा। सरकार का कहना है कि इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और यात्रियों को मराठी बोलने वाले प्रशिक्षित चालक उपलब्ध होंगे।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए राइड पूलिंग सेवा में महिला यात्रियों को केवल महिला चालक या महिला सहयात्रियों के साथ यात्रा करने का विकल्प दिया जाएगा। वहीं सभी एग्रीगेटर कंपनियों के मोबाइल ऐप और वेबसाइट मराठी, हिंदी और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक और वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों को बढ़ावा देने का भी निर्णय लिया है। साथ ही पहली बार कारपूलिंग सेवा को कानूनी मान्यता दी गई है। निजी वाहन से कारपूलिंग की अनुमति होगी, लेकिन उससे मुनाफा कमाना प्रतिबंधित रहेगा। केवल यात्रा का खर्च यात्रियों के बीच साझा किया जा सकेगा। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि यह नीति यात्रियों की सुरक्षा, चालकों के हित, स्थानीय युवाओं को रोजगार और पारदर्शी किराया व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए महाराष्ट्र में आधुनिक और जिम्मेदार एप-आधारित परिवहन व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

