
नई दिल्ली। भारतीय रेल ने कंटेनर ट्रेनों के परिचालन को अधिक सरल, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा निर्णय लिया है। रेल मंत्रालय ने भारतीय रेल नेटवर्क पर कंटेनर ट्रेनों के संचालन के लिए मॉडल कन्सेशन एग्रीमेंट (MCA) में महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दे दी है। नए प्रावधानों के तहत अब कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों (CTO) को अलग-अलग मार्गों के लिए अलग लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके स्थान पर 25 करोड़ रुपये के एकसमान पंजीकरण शुल्क के साथ सिंगल ऑल इंडिया लाइसेंस जारी किया जाएगा, जिससे ऑपरेटर पूरे भारतीय रेल नेटवर्क पर कंटेनर ट्रेनों का संचालन कर सकेंगे। इन संशोधनों को जल्द ही राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से लागू किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत वर्तमान मार्ग-वार लाइसेंस प्रणाली समाप्त कर दी जाएगी। रेल मंत्रालय की स्वीकृति के बाद जारी होने वाला एकल राष्ट्रीय लाइसेंस देशभर के सभी रेल मार्गों पर परिचालन की अनुमति देगा। साथ ही विभिन्न मार्ग श्रेणियों के लिए अलग-अलग पंजीकरण शुल्क की व्यवस्था भी खत्म कर दी गई है। अब प्रत्येक नए आवेदक को पूरे भारतीय रेल नेटवर्क पर परिचालन के लिए 25 करोड़ रुपये का एकमुश्त एवं अप्रतिदेय पंजीकरण शुल्क जमा करना होगा। रेल मंत्रालय ने लाइसेंस विस्तार को भी आसान बना दिया है। कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों को दी गई अनुमति की अवधि समाप्त होने के बाद, उनके संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर लाइसेंस को अगले 20 वर्षों के लिए बढ़ाया जा सकेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस विस्तार के लिए किसी भी प्रकार का विस्तार शुल्क नहीं लिया जाएगा। मौजूदा ऑपरेटरों को भी राहत दी गई है। कैटेगरी-I के लाइसेंसधारी अपनी वर्तमान कन्सेशन अवधि पूरी होने तक पुराने नियमों के तहत परिचालन जारी रख सकेंगे और बाद में नई व्यवस्था में बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के शामिल हो सकेंगे। वहीं कैटेगरी-II, III और IV के ऑपरेटरों को नई व्यवस्था में शामिल होने के लिए 15 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा, जो नए 25 करोड़ रुपये के शुल्क और पहले से जमा 10 करोड़ रुपये के बीच का अंतर है। ये ऑपरेटर चाहें तो अपनी वर्तमान 20 वर्ष की कन्सेशन अवधि समाप्त होने से पहले भी नई लाइसेंस व्यवस्था अपना सकते हैं। रेल मंत्रालय का मानना है कि इस सरल और एकसमान लाइसेंसिंग व्यवस्था से निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी, कंटेनर ट्रेनों का संचालन विस्तारित होगा और रेल आधारित माल परिवहन को नई गति मिलेगी। इससे उद्योगों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी तथा उन्हें अधिक किफायती और दक्ष परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही सड़क से रेल की ओर माल परिवहन बढ़ने से राष्ट्रीय राजमार्गों पर भीड़ कम होगी, ईंधन की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, जिससे देश में टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल माल परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। भारतीय रेल के अनुसार इन संशोधनों का उद्देश्य कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों के लिए एक समान, सरल और पारदर्शी लाइसेंसिंग व्यवस्था स्थापित करना है, जिससे अनुमोदन प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होगी और पूरे देश में कंटेनर ट्रेन परिचालन के लिए एक समान नियामकीय ढांचा उपलब्ध हो सकेगा।

