
मुंबई। राज्य में हरित ऊर्जा के उपयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ाने, पारेषण प्रणाली को अधिक सक्षम बनाने और ऊर्जा भंडारण तकनीक विकसित करने के उद्देश्य से महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने “महाराष्ट्र: एक्सेलेरेटिंग ग्रीन एनर्जी एंड स्टोरेज टेक्नोलॉजीज इंटीग्रेशन इन कनेक्टेड ग्रिड (MAGestic)” योजना को मंजूरी दे दी है। बुधवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस महत्वाकांक्षी परियोजना के प्राथमिक प्रोजेक्ट रिपोर्ट को भी स्वीकृति दी गई। इस योजना का लक्ष्य वर्ष 2030 तक राज्य के ऊर्जा मिश्रण में अक्षय ऊर्जा का हिस्सा 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करना है। इस योजना के तहत लगभग 12,303 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई है। इसमें नए उपकेंद्रों और पारेषण लाइनों का निर्माण, मौजूदा ट्रांसमिशन सिस्टम का आधुनिकीकरण, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) की स्थापना और पंप्ड हाइड्रो प्रोजेक्ट्स के लिए तकनीकी सहायता जैसे महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं। प्राथमिक प्रोजेक्ट रिपोर्ट को केंद्र सरकार के आर्थिक मामलों के विभाग को भेजने की भी मंजूरी दी गई है। परियोजना के लिए आवश्यक कुल धनराशि का लगभग 70 प्रतिशत यानी 8,616 करोड़ रुपये विश्व बैंक से ऋण के रूप में प्राप्त किया जाएगा। इस ऋण का पुनर्भुगतान महावितरण, महापारेषण, महानिर्मिती और एमआरईएल जैसी राज्य की ऊर्जा कंपनियां करेंगी। शेष 30 प्रतिशत राशि संबंधित कंपनियों द्वारा जुटाई जाएगी, जिसमें महावितरण के लिए राज्य सरकार 2026 से 2031 के बीच 1,377 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता प्रदान करेगी। इस योजना के माध्यम से राज्य की बढ़ती बिजली मांग को अक्षय ऊर्जा के जरिए पूरा करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही पारेषण नेटवर्क को मजबूत कर अधिकतम अक्षय ऊर्जा को ग्रिड से जोड़ना, ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ाना और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के अनुरूप उसकी क्षमता विकसित करना भी प्रमुख उद्देश्य हैं। योजना के अंतर्गत 40 नए उपकेंद्र स्थापित किए जाएंगे, पारेषण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की जाएगी और उच्च दक्षता वाले कंडक्टर लगाए जाएंगे। इसके अलावा 16,000 मेगावाट-घंटा क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित करने को प्रोत्साहन दिया जाएगा। कोयना, पानशेत और वरसगांव जैसे क्षेत्रों में पंप्ड हाइड्रो प्रोजेक्ट्स के लिए तकनीकी अध्ययन भी किया जाएगा। यह योजना वर्ष 2026 से 2031 के बीच चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ऊर्जा विभाग में एक विशेष सेल और परियोजना मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा। यह पहल महाराष्ट्र की हरित ऊर्जा नीति को मजबूती देने के साथ-साथ दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।




