
मुंबई। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में महाराष्ट्र देश में अग्रणी है। मातृभाषा में शिक्षा, कौशल आधारित शिक्षा, बहुविषयक पाठ्यक्रम, अनुसंधान को बढ़ावा और विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य इंटर्नशिप इन पांच प्रमुख बिंदुओं पर राज्य सरकार विशेष जोर दे रही है। गुरुवार को यह जानकारी उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने विधानसभा में नियम 293 के तहत हुई चर्चा का जवाब देते हुए दी। मंत्री पाटील ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति वर्ष 2020 में घोषित की गई थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसके क्रियान्वयन में देरी हुई। वर्ष 2022 में राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद नई शिक्षा नीति को तेजी से लागू करने की प्रक्रिया शुरू की गई और आज महाराष्ट्र इसके प्रभावी क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा मिलने से विद्यार्थियों की विषयों को समझने की क्षमता, अनुसंधान की प्रवृत्ति और नवाचार की क्षमता अधिक विकसित होती है। इसी कारण विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अन्य विषयों की गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री मराठी भाषा में उपलब्ध कराने पर सरकार जोर दे रही है। नई शिक्षा नीति के तहत स्कूली स्तर पर पहली कक्षा से पहले के तीन वर्षों की शिक्षा के लिए समान पाठ्यक्रम और प्रशिक्षित शिक्षकों की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही कम उम्र से ही भाषा, कौशल और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। उच्च शिक्षा में बहुविषयक शिक्षा प्रणाली लागू की गई है, जिसके तहत विद्यार्थियों को मुख्य विषय के साथ गौण विषय, कौशल विकास, व्यावसायिक कौशल, मूल्य शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा और परियोजना आधारित शिक्षा से जुड़े पाठ्यक्रमों का अध्ययन करना होता है। विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति का रिकॉर्ड डिजिटल माध्यम से रखने के लिए ‘अपार’ प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। राज्य में लगभग दो करोड़ विद्यार्थियों की अपार आईडी बनाई गई है और लाखों विद्यार्थियों के शैक्षणिक क्रेडिट डिजिटल रूप में दर्ज किए गए हैं। विद्यार्थियों को वास्तविक कार्य का अनुभव उपलब्ध कराने के लिए नई शिक्षा नीति के तहत इंटर्नशिप को विशेष महत्व दिया गया है। प्रत्येक महाविद्यालय को उद्योगों, संस्थाओं, सहकारी संस्थाओं, ग्राम पंचायतों और विभिन्न कार्यालयों के साथ समझौता कर विद्यार्थियों को इंटर्नशिप के अवसर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के लिए अंतिम छह महीने की इंटर्नशिप अनिवार्य की गई है, जिसे उद्योग क्षेत्र से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन, पाठ्यक्रमों की नियमित समीक्षा और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभिन्न समितियां कार्यरत हैं। नई शिक्षा नीति के तहत पहली बैच की पढ़ाई पूरी होने के बाद इसके परिणामों का अधिक गहन मूल्यांकन किया जाएगा। मंत्री पाटील ने बताया कि मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने के बाद मराठी भाषा विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव भी राज्य सरकार के विचाराधीन है। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों के डिजिटलीकरण, नए पाठ्यक्रमों, अनुसंधान को प्रोत्साहन, डिजिटल साक्षरता, ऑनलाइन शिक्षा, रोजगारोन्मुखी गतिविधियों और विद्यार्थियों के



