
मुंबई। भारतीय संविधान के शिल्पकार एवं भारतरत्न डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर ने सामाजिक न्याय, समानता और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए आजीवन संघर्ष किया। समाज के वंचित एवं उपेक्षित वर्गों को शिक्षा, सम्मान, समान अवसर और न्याय दिलाने के लिए उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। डॉ.आंबेडकर के विचार समतामूलक भारत के निर्माण के लिए आज भी मार्गदर्शक हैं। गुरुवार को यह बात महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने मुंबई में डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा स्थापित पीपल्स एजुकेशन सोसायटी के 81वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कही। राज्यपाल ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की विरासत हमें समाज में व्याप्त असमानता, जातिवाद, ऊंच-नीच की भावना और लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने का संदेश देती है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सक्षम और सशक्त बनाने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा। प्रत्येक नागरिक को समान अवसर और आत्मसम्मान मिले, ऐसे भारत का निर्माण करना ही डॉ. आंबेडकर के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करने से अन्य लोगों को भी बेहतर कार्य करने तथा राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए स्वयं को समर्पित करने की प्रेरणा मिलती है। ऐसे पुरस्कार समाज में सकारात्मक सोच, परिश्रम की भावना और राष्ट्रसेवा के संस्कारों को अधिक मजबूत करते हैं। राज्यपाल ने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने तथा भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विकास का समावेशी होना आवश्यक है। समाज का प्रत्येक वर्ग विकास की मुख्यधारा से जुड़ेगा, तभी इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा। इस अवसर पर राज्यपाल ने महाराष्ट्र विधान परिषद की पूर्व उपसभापति डॉ. नीलम गोऱ्हे और उद्योगपति पद्मश्री डॉ. अशोक खाड़े को पीपल्स एजुकेशन सोसायटी की ओर से दिया जाने वाला ‘भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर पुरस्कार’ प्रदान किया। कार्यक्रम में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री तथा पीपल्स एजुकेशन सोसायटी के अध्यक्ष रामदास आठवले, भदंत डॉ. राहुल बोधि महाथेरो, सोसायटी के न्यासी एडवोकेट उज्ज्वल निकम, एडवोकेट बी.के.बर्वे, डॉ. वेंकट स्वामी, अरविंद सोनटक्के, सोसायटी के सचिव डॉ. वासुदेव गाडे, राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नारनवरे, सोसायटी की कार्यकारिणी के सदस्य चंद्रशेखर कांबले सहित पुरस्कार प्राप्तकर्ता और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।



