
नई दिल्ली। नई दिल्ली में आयोजित ‘एनुअल बिजनेस समिट-2026’ में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि भविष्य की आर्थिक नेतृत्व क्षमता का निर्धारण बुनियादी ढांचा, नवाचार, प्रतिभा, स्वच्छ ऊर्जा, सुव्यवस्थित शहरीकरण, प्रौद्योगिकी और संस्थागत विश्वास जैसे कारकों से होगा। जो अर्थव्यवस्थाएं इन सभी शक्तियों का प्रभावी समन्वय कर सकेंगी, वही आने वाले समय में दुनिया का नेतृत्व करेंगी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र इसी दिशा में आवश्यक इकोसिस्टम तैयार कर रहा है और वैश्विक अर्थव्यवस्था के अगले दौर के लिए पूरी तरह तैयार हो रहा है। सोमवार को मुख्यमंत्री नई दिल्ली स्थित ताज पैलेस में आयोजित कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) के दो दिवसीय ‘एनुअल बिजनेस समिट-2026’ के अंतर्गत आयोजित ‘विजन फॉर इंडिया@100’ परिसंवाद को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर सीआईआई के डायरेक्टर जनरल चंद्रदीप बनर्जी और अध्यक्ष राजीव मेमानी भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास में कुछ क्षण ऐसे होते हैं जब देश केवल परिवर्तन में भागीदार बनते हैं, जबकि कुछ क्षण ऐसे होते हैं जब देश स्वयं परिवर्तन की दिशा तय करते हैं। वर्तमान समय भारत के लिए ऐसा ही ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, तकनीकी परिवर्तन, ऊर्जा संक्रमण, आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव और आर्थिक अनिश्चितताओं से गुजर रही है, लेकिन इन परिस्थितियों में भारत ही ऐसा देश है जो वैश्विक स्तर पर विश्वास पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले दशक में वैश्विक मंच पर अपनी नई पहचान स्थापित की है। अब भारत को केवल संभावनाओं वाले देश के रूप में नहीं, बल्कि अवसरों का निर्माण करने और नीतियों को तेजी से लागू करने वाले राष्ट्र के रूप में देखा जा रहा है।
महाराष्ट्र बना देश की ‘डेटा सेंटर’ और ‘स्टार्टअप’ राजधानी
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री की दूरदर्शी नीतियों को लागू करने की जिम्मेदारी राज्यों पर है और महाराष्ट्र इस परिवर्तन का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था वर्तमान में 660 अरब डॉलर की है, जो देश की जीडीपी में लगभग 15 प्रतिशत योगदान देती है। उन्होंने कहा कि देश में आने वाले कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का लगभग 40 प्रतिशत निवेश अकेले महाराष्ट्र में आता है। इंजीनियरिंग निर्यात में राज्य की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से अधिक है और महाराष्ट्र देश की ‘डेटा सेंटर’ तथा ‘स्टार्टअप’ राजधानी बन चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना और 2047 तक विश्व की प्रमुख क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होना है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष दावोस में महाराष्ट्र को लगभग 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
एशिया का प्रमुख ‘डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर’ बन रहा महाराष्ट्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था केवल पारंपरिक उद्योगों पर आधारित नहीं होगी, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, स्वच्छ ऊर्जा और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों से तय होगी। महाराष्ट्र स्वयं को इस परिवर्तन के केंद्र में स्थापित कर रहा है। उन्होंने बताया कि देश के लगभग 60 प्रतिशत डेटा सेंटर महाराष्ट्र में स्थित हैं और राज्य एशिया के सबसे महत्वपूर्ण डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर के रूप में उभर रहा है। राज्य इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण में अग्रणी है और देश के कुल ऑटोमोबाइल उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत योगदान देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र की महत्वाकांक्षा केवल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजाइन, नवाचार और वैश्विक बौद्धिक संपदा निर्माण तक विस्तारित है।
गड़चिरोली बनेगा देश का सबसे बड़ा ‘ग्रीन स्टील’ जिला
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा संक्रमण वर्तमान समय का सबसे बड़ा आर्थिक अवसर है। महाराष्ट्र अक्षय ऊर्जा, ईवी इकोसिस्टम, ग्रीन मोबिलिटी और टिकाऊ औद्योगिक ढांचे के विस्तार पर तेजी से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि मुंबई वैश्विक वित्तीय और नवाचार राजधानी के रूप में विकसित होगी, जबकि पुणे तकनीक और अनुसंधान केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करेगा। नागपुर लॉजिस्टिक्स और भू-रणनीतिक केंद्र बनेगा तथा छत्रपति संभाजीनगर और नाशिक नए औद्योगिक हब के रूप में विकसित होंगे। उन्होंने घोषणा की कि वर्ष 2032 तक गड़चिरोली देश का सबसे बड़ा ‘ग्रीन स्टील’ उत्पादक जिला बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संतुलित क्षेत्रीय विकास केवल सामाजिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी अत्यंत आवश्यक है। द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहर आने वाले समय में औद्योगिक विकास के नए इंजन बनेंगे।
उद्योग और सरकार मिलकर बनाएंगे भविष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत उसका खुलापन, उद्यमशीलता और नवाचार को अपनाने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि राज्य उद्योगों को केवल निवेशक नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में सहभागी के रूप में देखता है। उन्होंने कहा कि भविष्य ऐसे समाज का होगा जहां सरकार, उद्योग, शैक्षणिक संस्थान और शोधकर्ता साझा लक्ष्य के साथ मिलकर काम करेंगे। इस दिशा में सीआईआई जैसी संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भारत वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब आने वाली पीढ़ियां वर्तमान समय को परिवर्तन के स्वर्णिम काल के रूप में याद करेंगी।




