
मुंबई। जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरण तक सीमित मुद्दा नहीं है, बल्कि यह दुनिया के भविष्य से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर, व्यापक और संवेदनशील प्रश्न है। इस पृष्ठभूमि में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। यह जानकारी पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे ने दी। गुरुवार को विधान परिषद में नियम 92 के तहत सदस्य सुनील शिंदे ने इस विषय पर आधे घंटे की चर्चा उठाई थी।
मंत्री पंकजा मुंडे ने बताया कि वर्ष 2021 में राज्य सरकार ने जलवायु कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है, जिसमें 350 से अधिक विशेषज्ञ और अधिकारी शामिल हैं। इस कार्ययोजना को केंद्र सरकार की भी मंजूरी मिल चुकी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 से 2025 के बीच तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और विशेष रूप से 2025 को सबसे अधिक गर्म वर्ष माना गया। पिछले 50 वर्षों में गर्म और अत्यधिक गर्म दिनों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। मंत्री मुंडे ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दृष्टिकोण से देश के सबसे संवेदनशील पाँच राज्यों में महाराष्ट्र भी शामिल है। महाराष्ट्र तेजी से विकसित हो रहा राज्य है, जहाँ सड़क, उद्योग और बुनियादी ढाँचे का बड़े पैमाने पर विकास हो रहा है। ऐसे में विकास की इस प्रक्रिया के साथ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखना आवश्यक है, इसी उद्देश्य से यह कार्ययोजना तैयार की गई है। इस योजना में “रिफ्यूज, रिड्यूस, रीयूज, रिसायकल और रिकवर” यानी पाँच सिद्धांतों पर विशेष जोर दिया गया है। पंकजा मुंडे ने बताया कि कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए डीकार्बोनाइजेशन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस योजना के तहत कुछ अमृत शहरों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं और उन शहरों के लिए अलग-अलग जलवायु कार्ययोजना तैयार की गई है। आगे के चरण में प्रत्येक जिले के लिए वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर अलग-अलग कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके तहत जिले में फसलों की पद्धति, नदियों की स्थिति, वर्षा की मात्रा, मिट्टी का प्रकार और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों जैसे सभी पहलुओं का अध्ययन कर आवश्यक उपाय तय किए जाएंगे। मंत्री पंकजा मुंडे ने स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन विकास की प्रक्रिया के साथ उसके दुष्प्रभावों को कम करने और संतुलन बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ठोस कदम उठा रही है।




