
मुंबई। राज्य में उद्योग, प्रशासन और सार्वजनिक सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए मंत्रिमंडल बैठक में ‘महाराष्ट्र एआई नीति-2026’ की घोषणा की गई। बुधवार को बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की। ‘इंडिया एआई मिशन’ की तर्ज पर तैयार इस नीति के माध्यम से शोध, नवाचार और जिम्मेदार प्रशासन को गति दी जाएगी। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि आने वाले समय में एआई के कारण लगभग 70 प्रतिशत नौकरियों का स्वरूप बदल जाएगा, इसलिए इस नीति को समय-समय पर अद्यतन करना आवश्यक होगा। इस नीति के तहत वर्ष 2031 तक 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक निवेश आकर्षित करने और डेढ़ लाख से अधिक रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। वैश्विक स्तर पर एआई क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच महाराष्ट्र ने ‘नैतिक और समावेशी एआई विकास के राष्ट्रीय केंद्र’ के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए ‘महाराष्ट्र एआई मिशन’ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही राज्य के दो लाख युवाओं और पेशेवरों को एआई कौशल का प्रशिक्षण देने की योजना भी शामिल है, ताकि मानव संसाधन को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सके। यह नीति सात प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। पहला स्तंभ राज्यव्यापी एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से संबंधित है, जिसमें कम से कम 2000 जीपीयू कंप्यूटिंग क्षमता विकसित करने और ‘कंप्यूट ऐज अ सर्विस’ मॉडल के जरिए सरकारी विभागों को भी इसका लाभ उपलब्ध कराने की योजना है। इसके साथ ही पांच नवाचार क्षेत्रों में एआई शहर विकसित किए जाएंगे। दूसरा स्तंभ स्थानीय डेटा के उपयोग पर केंद्रित है, जिसमें मराठी सहित क्षेत्रीय और आदिवासी भाषाओं के डेटासेट तैयार कर ‘स्टेट एआई डेटा एक्सचेंज’ स्थापित किया जाएगा। तीसरे स्तंभ के तहत ‘महाराष्ट्र एडवांस्ड सेंटर फॉर एआई ट्रेनिंग’ (MCAT) की स्थापना की जाएगी, जो उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से संचालित होगा। नीति में स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। लगभग 5000 MSME को एआई अपनाने के लिए 20 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा और ‘महा एआई टूल्स हब’ स्थापित किया जाएगा। स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए 500 करोड़ रुपये का ‘एआई स्टार्टअप वेंचर फंड’ बनाया जाएगा, जिसमें सरकार और उद्योग क्षेत्र समान योगदान देंगे। राज्य में कम से कम एक एआई यूनिकॉर्न तैयार करने का भी लक्ष्य रखा गया है। पांचवें स्तंभ के अंतर्गत राज्यभर में 12 एआई इनक्यूबेटर स्थापित किए जाएंगे, जहां स्टार्टअप्स को एक करोड़ रुपये तक अनुदान मिलेगा, जबकि महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। छठे स्तंभ में स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, शहरी विकास, मराठी भाषा-संस्कृति और वित्त-राजस्व जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे। सातवें स्तंभ के तहत नैतिक एआई उपयोग के लिए स्थायी ढांचा तैयार किया जाएगा और सभी सरकारी विभागों में वार्षिक एआई तत्परता ऑडिट अनिवार्य होगा। उद्योगों को आकर्षित करने के लिए इस नीति में कई आर्थिक प्रोत्साहन भी शामिल किए गए हैं। इनमें 20 प्रतिशत तक पूंजीगत अनुदान, 100 प्रतिशत स्टांप शुल्क में छूट, बिजली दरों में सब्सिडी, पेटेंट लागत की प्रतिपूर्ति और प्रमाणन खर्च में सहायता जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भाग लेने वाले उद्योगों को भी आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इस नीति के माध्यम से महाराष्ट्र एआई के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में उभरने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार और तकनीकी विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।




