
मुंबई। महाराष्ट्र में महिला सशक्तिकरण का मजबूत प्रतीक बन चुका ‘महालक्ष्मी सरस’ अब एक व्यापक आर्थिक आंदोलन का रूप ले रहा है। राज्य में 50 लाख से अधिक ‘लखपति दीदी’ सक्रिय हैं, जो न केवल स्वयं उद्यमी बनी हैं, बल्कि रोजगार सृजन कर समाज और परिवार की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। इसी कड़ी में महिला उद्यमियों के उत्पादों को बड़ा बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 2 से 14 मई तक बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में ‘महालक्ष्मी सरस’ प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। इस प्रदर्शनी से आम नागरिकों को भी एक अलग और समृद्ध अनुभव मिलेगा, ऐसा विश्वास ‘उमेद-एमएसआरएलएम’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी निलेश सागर ने व्यक्त किया। गुरुवार को मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार परिषद में ‘उमेद’ के मुख्य परिचालन अधिकारी निखिल ओसवाल भी उपस्थित थे। इस दौरान निलेश सागर ने बताया कि ‘उमेद’ अभियान के माध्यम से ‘महालक्ष्मी सरस’ अब महिलाओं को आत्मनिर्भरता, नेतृत्व और सामाजिक पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम बन चुका है। ग्रामीण महिलाएं अब केवल पारंपरिक उत्पादों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कृषि आधारित प्रोसेसिंग उद्योगों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। अब तक महिलाओं को 50,000 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण वितरित किया गया है, जिसमें पिछले वर्ष ही 10,000 करोड़ रुपये शामिल हैं। खास बात यह है कि महिला उद्यमियों की ऋण पुनर्भुगतान दर 98 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। इस प्रदर्शनी में कुल 500 स्टॉल लगाए जाएंगे, जिनमें महाराष्ट्र के 230, अन्य राज्यों के 66, नवाचार आधारित महिला समूहों के 68 और महिला किसान उत्पादक कंपनियों (FPO) के 34 स्टॉल शामिल हैं। इसके अलावा नाबार्ड, माविम, खादी एवं ग्रामोद्योग मंडल, मुंबई महानगरपालिका सहित विभिन्न सरकारी संस्थाओं के 22 स्टॉल भी प्रदर्शनी का हिस्सा होंगे। इसका प्रमुख आकर्षण 80 स्टॉल वाला वातानुकूलित फूड कोर्ट होगा, जहां राज्यभर की महिलाओं द्वारा तैयार पारंपरिक और स्वादिष्ट व्यंजन उपलब्ध होंगे। साथ ही हस्तकरघा वस्त्र, वारली और बंजारा कला, लकड़ी के खिलौने, आभूषण और अन्य ग्रामीण उत्पादों की खरीदारी का अवसर भी मिलेगा। खरीदे गए सामान के लिए लॉकर्स की सुविधा और शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। ‘उमेद’ परिवार के करीब 65 लाख सदस्य यहां अपनी कला प्रस्तुत करेंगे। इस वर्ष प्रदर्शनी में एआर फोटोग्राफी, एनामॉर्फिक वॉल्स और इन्फोग्राफिक वॉल्स जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, वहीं 25 किलोमीटर के दायरे में मुफ्त होम डिलीवरी की व्यवस्था भी की गई है। महाराष्ट्र के अलावा केरल, गुजरात, बिहार, तमिलनाडु, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के 60 से अधिक स्टॉल भी इसमें शामिल होंगे।अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य केवल बिक्री का मंच उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि महिलाओं को संगठित, टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उद्यमी बनाना है। ‘लोकल टू ग्लोबल’ की अवधारणा को साकार करते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म, ब्रांडिंग और ई-कॉमर्स के जरिए महिला उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। ‘महालक्ष्मी सरस’ अब एक दीर्घकालिक आर्थिक मॉडल बनता जा रहा है, जो ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय समावेशन, डिजिटल सशक्तिकरण और ब्रांडिंग से जोड़ रहा है। यह पहल न केवल महिलाओं की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही है, बल्कि महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को भी नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।




