
मुंबई। महाराष्ट्र शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा मंत्रालय में 4 से 8 मई 2026 के दौरान ‘टेक-वारी 2.0’ के अंतर्गत ‘महाराष्ट्र प्रशिक्षण सप्ताह’ का आयोजन किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यकुशलता, गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक के साथ तालमेल को मजबूत करना है। इस प्रशिक्षण में करीब 6 हजार कर्मचारी प्रत्यक्ष रूप से भाग ले रहे हैं, जबकि 9 लाख से अधिक कर्मचारियों तक प्रत्येक सत्र का सीधा प्रसारण किया जाएगा, ताकि राज्य का कोई भी कर्मचारी इस पहल से वंचित न रहे।
एक सप्ताह में 35 लाख घंटे का प्रशिक्षण
अप्रैल 2026 में आयोजित ‘महा-साधना सप्ताह’ के दौरान 8.8 लाख से अधिक कर्मचारियों ने iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर कम से कम 4 घंटे का संरचित प्रशिक्षण पूरा किया। इसमें ‘सार्वजनिक प्रशासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता’, ‘साइबर सुरक्षा के मूल तत्व’, भारतीय प्रबंधन संस्थान बेंगलुरु द्वारा ‘सार्वजनिक नीति’ तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद द्वारा ‘रणनीति और गेम थ्योरी’ जैसे पाठ्यक्रम शामिल थे। इन सात दिनों में कुल 35 लाख घंटे का प्रशिक्षण दर्ज किया गया, जिसे क्षमता निर्माण आयोग (CBC) द्वारा सराहा गया।
वैश्विक स्तर पर कौशल विकास की चुनौती
तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया में सरकारी कर्मचारियों को तैयार करना एक वैश्विक चुनौती बन गया है। सिंगापुर ‘स्किल्सफ्यूचर’ के जरिए कौशल विकास पर जोर दे रहा है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात सरकारी संस्थाओं में एआई अधिकारियों की नियुक्ति कर रहा है। एस्टोनिया ‘डिजिटल स्टेट अकादमी’ संचालित कर रहा है।
यूनेस्को के 2025 के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के आधे से भी कम देशों ने अपनी ई-गवर्नेंस नीतियों में एआई को शामिल किया है।
‘टेक-वारी’ क्यों जरूरी
आज तकनीक केवल बैक-ऑफिस तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह फ्रंट-ऑफिस का भी हिस्सा बन चुकी है। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के तहत विभागों की जिम्मेदारियां बढ़ी हैं। डिजिलॉकर, उमंग, आधार और इंडिया स्टैक जैसे प्लेटफॉर्म ने नागरिक-सरकार संवाद में बड़ा बदलाव लाया है।
विशेषज्ञों के सत्र और आधुनिक विषय
‘टेक-वारी 2.0’ के तहत डिजिटल गवर्नेंस, डेटा संरक्षण, क्वांटम कंप्यूटिंग, जनरेटिव एआई, साइबर सुरक्षा और प्रशासनिक नैतिकता जैसे विषयों पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए हैं।
इसमें नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, आईबीएम और नैसकॉम के विशेषज्ञ मार्गदर्शन दे रहे हैं। यह पहल देवेंद्र फडणवीस और मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में संचालित की जा रही है और इसे राज्य की प्राथमिकता में शामिल किया गया है।
तकनीक के साथ संस्कृति का संगम
इस कार्यक्रम में ‘तालरंग’, ‘नादरंग’, ‘योगरंग’, ‘कलारंग’ और ‘संस्कृति रंग’ जैसे सांस्कृतिक आयोजनों को भी शामिल किया गया है, जिनका उद्देश्य टीमवर्क, मानसिक संतुलन और तनावमुक्ति को बढ़ावा देना है।
निरंतर सीखने की दिशा में कदम
‘टेक-वारी 2.0’ को प्रशासनिक सुधार की एक सतत प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। ‘महा-साधना सप्ताह’ के दौरान प्राप्त 35 लाख घंटे का प्रशिक्षण बेहतर निर्णय क्षमता, तेज शिकायत निवारण और नागरिकों को अधिक सुलभ सेवाएं प्रदान करने में सहायक माना जा रहा है।




