Homeउत्तर प्रदेशझांसी में पोक्सो एक्ट पर विधिक संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित

झांसी में पोक्सो एक्ट पर विधिक संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित

सुरक्षित बचपन और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने पर दिया गया जोर

झांसी, उत्तर प्रदेश। माननीय जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष कमलेश कच्छल के कुशल निर्देशन तथा माननीय सिविल जज (सीनियर डिवीजन)/ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ईशा त्रिपाठी के नेतृत्व में पुलिस लाइन झांसी के सभागार में एक दिवसीय विधिक संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा संचालित ‘जागृति योजना’ के अंतर्गत “पोक्सो एक्ट संवेदीकरण: सुरक्षित बचपन–सुरक्षित भविष्य” विषय पर आयोजित की गई। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बाल अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना तथा पीड़ित बच्चों को त्वरित, संवेदनशील एवं न्यायसंगत सहायता उपलब्ध कराना था।कार्यशाला में जनपद के विभिन्न थानों में नियुक्त बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, महिला हेल्प डेस्क पर तैनात महिला उपनिरीक्षक, पोक्सो एक्ट से संबंधित मामलों की विवेचना कर रहे विवेचक तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता एवं संदर्भ व्यक्ति के रूप में उपस्थित चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल श्री प्रतीक समाधिया ने पुलिस अधिकारियों को पोक्सो एक्ट से जुड़े तकनीकी एवं व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने पोक्सो मामलों में पीड़ित बच्चों के बयान दर्ज करते समय बरती जाने वाली संवेदनशीलता, उनके अधिकारों की सुरक्षा, एफआईआर दर्ज करने से लेकर विवेचना पूर्ण कर न्यायालय में आरोपपत्र प्रस्तुत करने तक की वैधानिक समय-सीमा तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से उपलब्ध अंतरिम एवं अंतिम आर्थिक सहायता एवं मुआवजा प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला के अंतिम सत्र में संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें फील्ड में कार्यरत विवेचकों एवं महिला उपनिरीक्षकों ने पोक्सो मामलों की जांच के दौरान आने वाली व्यावहारिक एवं कानूनी चुनौतियों, गवाहों के बयान तथा मेडिकल साक्ष्यों से जुड़ी जिज्ञासाएं साझा कीं। चीफ एलएडीसी श्री प्रतीक समाधिया ने सरल एवं स्पष्ट कानूनी व्याख्या के माध्यम से सभी प्रश्नों का समाधान करते हुए उपस्थित पुलिस अधिकारियों की विधिक शंकाओं का निराकरण किया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से कहा गया कि पुलिस और न्यायपालिका की संवेदनशीलता ही बच्चों के लिए भयमुक्त, सुरक्षित और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण की आधारशिला है। उपस्थित पुलिस अधिकारियों ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को विवेचना की गुणवत्ता बढ़ाने तथा पीड़ित बच्चों को बेहतर न्याय दिलाने की दिशा में अत्यंत उपयोगी और प्रभावी बताया।

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