
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बिहार, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल तथा प्रख्यात शिक्षाविद पद्मश्री डॉ. डी.वाय.पाटील के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा, सहकार और सामाजिक क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान ने उन्हें अनेक संस्थाओं का आधारस्तंभ बनाया। उनके निधन से शिक्षा जगत, सामाजिक जीवन और सार्वजनिक क्षेत्र को अपूरणीय क्षति हुई है। मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि डॉ.पाटील ने अपने नाम ‘ज्ञानदेव’ के अनुरूप जीवनभर ज्ञान की साधना की और शिक्षा को ही अपना मिशन बनाया। एक छोटे से विद्यालय से शुरू हुआ उनका सफर आगे चलकर लगभग 200 शैक्षणिक संस्थानों, आठ विश्वविद्यालयों और हजारों विद्यार्थियों तक पहुंचा। उन्होंने चिकित्सा, इंजीनियरिंग, फार्मेसी, आर्किटेक्चर सहित विभिन्न क्षेत्रों में उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना कर महाराष्ट्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि डॉ. पाटील ने आधुनिक शैक्षणिक परिसरों और चिकित्सा संस्थानों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार किया। वे दो बार विधायक भी रहे, लेकिन उनकी वास्तविक पहचान शिक्षा, सहकार और समाजसेवा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय कार्यों से बनी। उनके नेतृत्व में भव्य शैक्षणिक संकुलों के साथ डॉ. डी.वाय.पाटील अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम जैसे प्रतिष्ठित प्रकल्प भी साकार हुए। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि डॉ. डी.वाय.पाटील सहकार, शिक्षा, साहित्य, संस्कृति और सामाजिक आंदोलनों के प्रेरणास्रोत थे। उन्होंने जीवनभर शिक्षा, सेवा और विनम्रता के मूल्यों को अपनाया। उनका यह विचार कि “अहंकार जीवन का मृत्यु है, जबकि अहंकार का अंत ही सच्चा जीवन है” उनके संपूर्ण व्यक्तित्व और जीवन दर्शन को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. पाटील द्वारा स्थापित शिक्षा और सेवा की परंपरा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उनके निधन से देश ने एक दूरदर्शी शिक्षाविद और समाजसेवी को खो दिया है। उन्होंने शोक संतप्त परिवार, उनके शैक्षणिक संस्थानों और उनसे जुड़े सभी लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से उन्हें इस दुख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की।

