
मुंबई। कार्यस्थलों पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न से सुरक्षा, रोकथाम और निवारण अधिनियम 2013 के अनुसार, जिन सरकारी या निजी कार्यालयों में 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, उन्हें आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee) की स्थापना करना अनिवार्य है। इस अधिनियम के तहत, यदि कोई संस्था ऐसी समिति स्थापित करने में विफल रहती है, तो 50,000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही, नियमों और जिम्मेदारियों का पालन न करने पर संबंधित संस्था का लायसेंस रद्द किया जा सकता है, और दोगुना जुर्माना लगाया जा सकता है। यह जानकारी मुंबई उपनगर जिले के महिला व बाल विकास अधिकारी संजय धनगर ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी। उन्होंने बताया कि इस नियम का उद्देश्य महिलाओं के लिए कार्यस्थल को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाना है। इसके तहत सरकारी कार्यालयों के साथ-साथ दुकानें, शैक्षणिक संस्थान, खेल संस्थाएं, फिल्म संस्थाएं और निजी कंपनियां भी शामिल हैं।
रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपना अनिवार्य
मुंबई उपनगर जिले की सभी सरकारी और निजी संस्थाओं को यह समिति गठित करने के बाद उसकी जानकारी बांद्रा स्थित जिलाधिकारी कार्यालय या चेंबूर स्थित जिला महिला व बाल विकास अधिकारी कार्यालय में रिपोर्ट के रूप में जमा करानी अनिवार्य है। अधिकारियों ने सभी संस्थानों से अनुरोध किया है कि वे शीघ्र ही समिति का गठन करें और इसकी रिपोर्ट निर्धारित पते पर जमा कराएं, ताकि अधिनियम का पालन हो सके और कार्यस्थल महिलाओं के लिए सुरक्षित बन सके।




