Thursday, March 19, 2026
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महाराष्ट्र सरकार की मौजूदा वित्तीय स्थिति में किसानों को फिलहाल नहीं मिलेगी कर्ज माफी: अजित पवार

बारामती। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजित पवार ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि राज्य की मौजूदा वित्तीय स्थिति के कारण किसानों के लिए फसल कर्ज माफी अभी संभव नहीं होगी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार अपनी वित्तीय स्थिति पर विचार करने के बाद भविष्य में निर्णय लेगी। उपमुख्यमंत्री अजित पवार का यह बयान महाराष्ट्र के किसानों के लिए निराशाजनक है, क्योंकि वे हाल ही में विधानसभा चुनावों के दौरान महायुति गठबंधन द्वारा की गई फसल ऋण माफी की घोषणा का इंतजार कर रहे थे। किसानों की रैली में अजित पवार ने कहा, “चुनाव से पहले कुछ लोगों ने कर्जमाफी के बारे में बयान दिए थे। लेकिन मौजूदा वित्तीय स्थिति में अभी फसल कर्जमाफी की घोषणा करना संभव नहीं है। इस साल और अगले साल कोई फसल कर्जमाफी नहीं होगी। सरकार की वित्तीय स्थिति के कारण हम इसकी घोषणा नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने वित्तीय अनुशासन को ध्यान में रखते हुए बजट तैयार किया है, हालांकि विपक्ष ने इस बजट की आलोचना की है। हाल ही में संपन्न बजट सत्र में विपक्षी दलों ने विधानसभा चुनावों के दौरान किए गए फसल ऋण माफी के वादे को पूरा न करने के लिए महायुति सरकार की आलोचना की। एनसीपी (एसपी) विधायक और पूर्व वित्त मंत्री जयंत पाटिल ने कहा कि सरकार ने चुनाव के दौरान किसानों से किए गए वादे पूरे नहीं किए और महाराष्ट्र की आर्थिक स्थिति को निराशाजनक बताया।
कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि किसान बढ़ती उत्पादन लागत और कृषि उपज के कम बाजार मूल्यों के कारण संकट में हैं और कर्जमाफी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। भाजपा के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने भी अपनी ही सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि कृषि ऋण माफी के लिए 20,000 करोड़ रुपये की आवश्यकता है, जो कि एक वर्ष में सरकारी कर्मचारियों को वेतन और पेंशन के रूप में दी जाने वाली बढ़ी हुई राशि से भी कम है। उन्होंने बताया कि 2023-24 में महाराष्ट्र सरकार ने कर्मचारियों के वेतन पर 1,42,718 करोड़ रुपये खर्च किए, 2024-25 में इस राशि में 16,316 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई, और पेंशन के लिए 13,565 करोड़ रुपये अलग रखे गए। कुल मिलाकर एक साल में सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में 29,881 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। मुनगंटीवार ने सवाल उठाया कि जब सरकारी कर्मचारियों की वेतन वृद्धि के लिए पैसा है, तो किसानों की कर्जमाफी के लिए पैसा क्यों नहीं है? अब महाराष्ट्र के किसान सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल यह साफ है कि अगले दो वर्षों तक फसल ऋण माफी की उम्मीद नहीं है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बना रहा है, लेकिन अजित पवार के बयान से साफ है कि महायुति सरकार फिलहाल इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाने के मूड में नहीं है।

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