
मुंबई। राज्य में जल प्रबंधन को अधिक गतिशील, जनसहभागी और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से ‘जल व्यवस्थापन कृती पंधरवडा’ के तहत ‘गोदा से नर्मदा’ पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होळकर जलयात्रा 2026 का आयोजन किया जा रहा है। जलसंपदा मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने पत्रकार परिषद में बताया कि इस जलयात्रा के माध्यम से जलसंवर्धन का व्यापक संदेश जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार के मार्गदर्शन में ‘विचार, विरासत और विकास’ की त्रिसूत्री पर आधारित यह यात्रा आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य जलसंवर्धन के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना और शाश्वत जल प्रबंधन को मजबूत करना है।
25 अप्रैल को होगा शुभारंभ
यह जलयात्रा 25 अप्रैल 2026 को पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होळकर के जन्मस्थान श्रीक्षेत्र चोंडी और गोदावरी नदी के उद्गम त्र्यंबकेश्वर से एक साथ शुरू होगी। त्र्यंबकेश्वर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों इसका शुभारंभ होगा, जहां 108 कन्याओं का पूजन और गोदामाता की पूजा सहित कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वहीं, चोंडी में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और विधान परिषद के सभापति राम शिंदे की उपस्थिति में कार्यक्रम आयोजित होगा।
शिर्डी में होगा संगम, फिर आगे बढ़ेगी यात्रा
चोंडी से निकली यात्रा अहिल्यानगर में ठहरेगी, जबकि त्र्यंबकेश्वर से निकली यात्रा नासिक, सिन्नर और संगमनेर होते हुए 26 अप्रैल को शिर्डी में मिलेगी। इसके बाद दोनों यात्राएं एक साथ आगे बढ़ेंगी। शिर्डी में इस अवसर पर सांस्कृतिक और जल-जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
मध्य प्रदेश के महेश्वर में होगा समापन
यात्रा 27 अप्रैल को छत्रपति संभाजीनगर और घृष्णेश्वर, 28 अप्रैल को धुले होते हुए 29 अप्रैल को मध्य प्रदेश के महेश्वर पहुंचेगी, जहां इसका समापन होगा।
30 नदी घाटियों का जल भी होगा शामिल
इस यात्रा की विशेषता यह है कि राज्य की 30 नदी घाटियों से जल कलश लाकर इसमें शामिल किए जाएंगे। विभिन्न स्थानों पर जनप्रतिनिधियों और किसानों की उपस्थिति में जलपूजन किया जाएगा और ये सभी कलश शिर्डी में एकत्रित होंगे।
500 से अधिक प्रतिभागी होंगे शामिल
इस जलयात्रा में लगभग 500 जलयात्री, वारकरी, युवा, सामाजिक संस्थाएं, किसान और नागरिक भाग लेंगे। ‘अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष’ के मद्देनजर महिला सहभागिता पर भी विशेष जोर दिया गया है। मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने कहा कि जलसंवर्धन समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और सामूहिक प्रयासों से ही राज्य के जल संसाधनों को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।




