
मुंबई। लेखक नामजोशी ने महाराष्ट्र के राज्यपाल से शिष्टाचार भेंट कर साहित्य, पुस्तकों और पठन-पाठन की संस्कृति पर चर्चा की। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि डिजिटल युग में भी मुद्रित पुस्तकों की प्रासंगिकता आज भी पूरी तरह बरकरार है। उन्होंने कहा कि मुद्रित पुस्तक पढ़ने का आनंद और उससे जुड़ा आत्मीय अनुभव कभी समाप्त नहीं होना चाहिए, क्योंकि पुस्तक पढ़ना केवल जानकारी प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि एक गहन, व्यक्तिगत और समृद्ध अनुभव है, जो व्यक्ति के विचार, संवेदनशीलता और व्यक्तित्व का विकास करता है।इस अवसर पर नामजोशी ने राज्यपाल को अपना लघुकथा संग्रह ‘मोगरा फुलला दारी’, विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों के साथ हुए पत्राचार का संकलन ‘स्मृतिगंधा’ तथा एक आदिवासी बालिका की उपलब्धियों और उसकी मां के त्याग पर आधारित प्रेरक उपन्यास ‘भीमा’ भेंट किया। भेंट के दौरान साहित्य, समाज और पठन संस्कृति को बढ़ावा देने से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई। इस अवसर पर नामजोशी के परिवार के सदस्य भी उपस्थित रहे।

