Thursday, February 26, 2026
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आयकर विभाग के 166वें स्थापना दिवस पर बोले राज्यपाल राधाकृष्णन—”मैत्रीपूर्ण कर व्यवस्था से बढ़ेगा विश्वास, रुकेगी चोरी”

मुंबई। देश की आर्थिक प्रगति में आयकर विभाग की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को कहा कि प्रभावी कर प्रशासन भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। वे मुंबई के कौटिल्य भवन में आयकर विभाग के 166वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के उपाध्यक्ष शक्तिजीत डे, प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त मालती श्रीधरन, विभिन्न कॉर्पोरेट प्रतिनिधि, वरिष्ठ व सेवानिवृत्त अधिकारी, और विभाग से जुड़े खिलाड़ी भी उपस्थित रहे। राज्यपाल ने अपने संबोधन में वर्तमान कर व्यवस्था की आक्रामक प्रवृत्तियों की आलोचना करते हुए कहा, “हम अक्सर करदाताओं की गलतियाँ ढूँढ़ते हैं और उन पर जुर्माना लगाते हैं, जिससे वे कर प्रणाली से बचने का प्रयास करते हैं।” इसके समाधान के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि विभाग को करदाताओं के प्रति मैत्रीपूर्ण रवैया अपनाना चाहिए। उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के सहयोग से प्रशिक्षण सम्मेलन, सरलीकरण, और डिजिटल प्रणाली को और आसान बनाने पर बल दिया। राज्यपाल राधाकृष्णन ने यह भी कहा कि कर ढाँचे में समय-समय पर सुधार होना आवश्यक है, ताकि अधिक से अधिक लोग स्वेच्छा से कर प्रणाली में शामिल हों। उन्होंने जर्मनी का उदाहरण देते हुए बताया कि वहाँ नियमित करदाताओं को सम्मान और पहचान पत्र प्रदान किए जाते हैं, और ऐसी प्रोत्साहन योजनाएँ भारत में भी अपनाई जानी चाहिए। एक विशेष टिप्पणी में उन्होंने कहा कि ऐसे लोग जो कृषि से नहीं बल्कि अन्य व्यावसायिक स्रोतों से आय अर्जित करते हैं, उन्हें केवल नाम मात्र की कृषि दिखाकर कर चोरी नहीं करनी चाहिए। इसके लिए पारदर्शी और तर्कसंगत नियमों को लागू करने की आवश्यकता है। इस अवसर पर राज्यपाल ने कौटिल्य (चाणक्य) की प्रतिमा का अनावरण किया और भारतीय स्टेट बैंक, टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड, एचडीएफसी बैंक लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन जैसे देश के शीर्ष करदाताओं को सम्मानित किया। विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारियों और उत्कृष्ट खिलाड़ियों को भी प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। राज्यपाल के भाषण ने यह स्पष्ट कर दिया कि करदाताओं के प्रति विश्वासपूर्ण और पारदर्शी दृष्टिकोण से ही राजकोषीय अनुशासन, कर संग्रह में वृद्धि, और जनभागीदारी सुनिश्चित की जा सकती है।

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