
मुंबई। संभावित कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए राज्य में जल संकट निवारण उपायों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। 15 अगस्त तक जल वितरण की प्रभावी योजना बनाई जाए तथा कोई भी पात्र किसान सरकारी सहायता से वंचित न रहे, इसके लिए ई-केवाईसी और एग्रीस्टैक डेटा को तेजी से अपडेट किया जाए। साथ ही राज्य की पुनर्वास नीति को अधिक समावेशी और समयानुकूल बनाने के लिए नई संशोधित नीति जल्द तैयार की जाएगी। यह जानकारी महाराष्ट्र के राहत एवं पुनर्वास मंत्री मकरंद जाधव-पाटील ने दी। गुरुवार को मंत्रालय में आयोजित राहत एवं पुनर्वास विभाग की समीक्षा बैठक में मंत्री जाधव-पाटील ने कहा कि खरीफ सीजन 2025-26 के दौरान अतिवृष्टि और बेमौसम बारिश से हुए नुकसान से संबंधित एग्रीस्टैक डेटा की सभी जिलाधिकारियों द्वारा समीक्षा की जाए। जिन किसानों को अब तक सहायता नहीं मिली है, उनके लिए विशेष शिविर आयोजित कर तत्काल सहायता वितरित की जाए। उन्होंने कहा कि किसान आत्महत्या से जुड़े लंबित मामलों की कमियों को दूर कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निपटाया जाए। इस वर्ष वर्षा कम होने की संभावना को देखते हुए सभी जिलाधिकारी 15 अगस्त तक जल वितरण की समुचित योजना तैयार करें। आवश्यकता पड़ने पर पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कुओं का अधिग्रहण भी किया जाए।मंत्री ने निर्देश दिए कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों से समन्वय स्थापित कर आवश्यकता के अनुसार चारा शिविरों के प्रस्ताव भी तैयार किए जाएं, ताकि पशुधन को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि आपदा के समय मानव हानि, घायल व्यक्तियों, पशुहानि, घरेलू सामान के नुकसान तथा छोटे दुकानदारों और ठेला-फेरी वालों को दी जाने वाली सहायता शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित समय में उपलब्ध कराई जानी चाहिए। मकरंद जाधव-पाटील ने बताया कि भूस्खलन प्रभावित गांवों के पुनर्वास, वर्ष 1976 से पहले की परियोजनाओं से प्रभावित पुनर्वसित बस्तियों में नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा बाढ़ प्रभावित गांवों के पुनर्स्थापन के लिए जल्द ही नई संशोधित पुनर्वास नीति लागू की जाएगी। नई नीति में 14 अक्टूबर 2022 के शासन निर्णय के मानकों में संशोधन करते हुए पुनर्वासित परिवारों को अधिक भूमि उपलब्ध कराने, आवास अनुदान राशि में उल्लेखनीय वृद्धि करने तथा पुनर्वास कॉलोनियों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने जैसे प्रावधान शामिल किए जाएंगे। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नई नीति लागू होने के बाद पुनर्वास संबंधी प्रस्ताव स्थानीय जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर संशोधित रूप में प्रस्तुत किए जाएं, ताकि प्रभावित नागरिकों को अधिक प्रभावी और स्थायी राहत मिल सके।



