
मुंबई। महाराष्ट्र की पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रश्मी शुक्ला को नई जिम्मेदारी सौंपते हुए राज्य की लोकायुक्त संस्था का सदस्य नियुक्त किया गया है। उनके साथ ओ.पी. गुप्ता और सुवर्णा केवले को भी लोकायुक्त सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। राज्य के विभिन्न संवैधानिक पदाधिकारियों की उपस्थिति में हुई महत्वपूर्ण बैठक में इन तीनों नियुक्तियों को अंतिम मंजूरी दी गई। सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, विधान परिषद के सभापति, विधानसभा अध्यक्ष तथा विधायक अनिल परब की उपस्थिति में आयोजित बैठक में इन नामों पर सहमति बनी। इसके साथ ही लंबे समय से लंबित लोकायुक्त सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो गई है। महाराष्ट्र में लोकायुक्त संस्था को अधिक प्रभावी और सशक्त बनाने की दिशा में इस निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लोकायुक्त व्यवस्था का उद्देश्य राज्य में भ्रष्टाचार विरोधी तंत्र को मजबूत करना और सार्वजनिक पदों पर कार्यरत व्यक्तियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है। लोकायुक्त की स्थापना और उसे अधिक अधिकार देने की मांग को लेकर वरिष्ठ समाजसेवी अण्णा हजारे ने लंबे समय तक आंदोलन चलाया था। इसके बाद महाराष्ट्र में लोकायुक्त कानून को लागू किया गया। वर्ष 2024 में राज्य में लोकायुक्त पद पर नियुक्ति की गई थी, लेकिन अन्य सदस्यों की नियुक्तियां लंबित होने के कारण संस्था पूर्ण क्षमता से कार्य नहीं कर पा रही थी। नई नियुक्तियों के बाद लोकायुक्त संस्था की संरचना मजबूत होगी और इसके कामकाज में गति आने की उम्मीद है। लोकायुक्त का मुख्य कार्य भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों की जांच करना तथा सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के कार्यों की निगरानी करना है। विशेष बात यह है कि महाराष्ट्र के वर्तमान कानून के अनुसार मुख्यमंत्री भी लोकायुक्त के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। ऐसे में आवश्यकता पड़ने पर मुख्यमंत्री के खिलाफ प्राप्त शिकायतों की जांच करने का अधिकार भी लोकायुक्त संस्था के पास है। नई नियुक्तियों के बाद राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक और जवाबदेही व्यवस्था को और मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।



