
रुद्रपुर, उत्तराखंड। ऊधम सिंह नगर कलेक्ट्रेट परिसर के मुख्य द्वार के बाहर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) का धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। सैकड़ों किसान अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरना स्थल पर डटे रहे। किसानों ने भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं स्वयं करते हुए आंदोलन जारी रखा तथा स्पष्ट किया कि उनका धरना पूरी तरह गैर-राजनीतिक है और किसी भी राजनीतिक दल को इसका मंच नहीं बनने दिया जाएगा। धरने के मद्देनजर कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। मुख्य गेट पर भारी पुलिस बल तैनात रहा, जबकि एसडीएम सदर भी मौके पर मौजूद रहे। किसानों के अनुसार प्रशासन ने पेयजल और बिजली की व्यवस्था उपलब्ध कराई है, जबकि टेंट, भोजन और अन्य व्यवस्थाएं किसानों ने स्वयं की हैं। धरना स्थल पर किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़, खटीमा विधायक भुवन कापड़ी और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल किसानों के समर्थन में पहुंचे। तीनों नेताओं ने किसानों की मांगों का समर्थन किया और कुछ समय तक उनके बीच बैठे, लेकिन किसान नेताओं ने आंदोलन को राजनीतिक मंच न बनाने की बात कहते हुए उन्हें मंच साझा करने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद सभी नेता वापस लौट गए। किसान नेता बाजवा ने कहा कि किसान अपने आंदोलन को किसी भी राजनीतिक रंग में नहीं रंगने देंगे। उन्होंने कहा कि किसान अपनी लड़ाई स्वयं लड़ने में सक्षम हैं और उन्हें किसी राजनीतिक सहारे की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस तरह किसान खेतों में काम करते समय अपने भोजन और अन्य जरूरतों की व्यवस्था खुद करते हैं, उसी तरह धरना स्थल पर भी सभी व्यवस्थाएं स्वयं की गई हैं। धरने पर बैठे किसानों ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगों में किसानों के ट्यूबवेलों के बिजली बिल माफ करना, घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देना, किसानों का संपूर्ण कर्ज माफ करना तथा पहाड़ी जिलों के किसानों को प्रतिमाह 20 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देना शामिल है। इसके अलावा किसानों ने बाजपुर क्षेत्र के 20 गांवों की भूमि पर लगी रोक हटाने, किसानों को भूमि पर पूर्ण अधिकार देने, वर्ष 2007 और वर्ष 2011-12 के गन्ना भुगतान का बकाया तत्काल जारी करने, प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगाने, पहले से लगे स्मार्ट मीटर हटाने तथा गन्ने का समर्थन मूल्य 700 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करने की भी मांग उठाई। किसानों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

