Tuesday, April 28, 2026
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संपादकीय: बिना आरक्षण के विदुषी भारतीय नारियां!

राजीव गांधी ने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की पहल की थी। आज जब 2023 में 33% आरक्षण बिल विपक्ष के सहयोग से पारित किया गया, तब 2024 के चुनाव में इसे लागू न करना मंशा पर सवाल उठाता है। अब विधानसभाओं, विशेष रूप से बंगाल के संदर्भ में, फिर से महिला आरक्षण का मुद्दा उठाना महिलाओं को भ्रमित करने जैसा प्रतीत होता है।कहा जाता है कि मनुस्मृति में महिलाओं की शिक्षा पर प्रतिबंध था, लेकिन यह तर्क दिया जाता है कि उसमें बाद में कई बातें जोड़ी गईं। प्राचीन भारतीय परंपरा में महिलाओं की विद्वता के अनेक उदाहरण मिलते हैं। ऋग्वेद के सूक्तों में विश्ववारा, लोपामुद्रा, अपाला, उर्वशी, घोषा, गार्गी, मैत्रेयी जैसी विदुषी महिलाओं का उल्लेख मिलता है। वैदिक काल में महिलाओं द्वारा सूक्त पाठ और उपनयन संस्कार के भी प्रमाण बताए जाते हैं।इतिहास में भी अनेक सशक्त महिलाओं का योगदान रहा है—दिल्ली की सुल्तान रज़िया बेगम, रानी लक्ष्मीबाई, अहिल्याबाई होलकर, महारानी दुर्गावती, जीजाबाई जैसी हस्तियाँ शासन और समाज दोनों में प्रभावशाली रहीं। साहित्य और कला में मीराबाई, महादेवी वर्मा, लाल देद जैसी महान कवयित्रियों ने अपनी पहचान बनाई।स्वतंत्रता संग्राम में भीकाजी कामा, दुर्गा भाभी, प्रीतिलता वाडेदार, विजयलक्ष्मी पंडित, राजकुमारी अमृत कौर, अरुणा आसफ अली, सुचेता कृपलानी, कस्तूरबा गांधी, मुथुलक्ष्मी रेड्डी, लक्ष्मी सहगल आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।आधुनिक भारत में राजनीति, खेल, उद्योग और कला के क्षेत्र में इंदिरा गांधी, प्रतिभा देवी पाटिल, द्रौपदी मुर्मू, पी. टी. ऊषा, जे. जे. शोभा, कुंजुरानी देवी, डायना एडुल्जी, साइना नेहवाल, कोनेरू हम्पी, सानिया मिर्जा, कर्णम मल्लेश्वरी, अरुंधति रॉय, चंदा कोचर, रेणु सूद कर्नाड, चित्रा रामकृष्ण, शिखा शर्मा, शुभलक्ष्मी, अर्चना भार्गव, नैना लाल किदवई, कल्पना मोरपारिया, ऊषा सांगवान, इला भट्ट और इंदिरा राजाराम जैसी महिलाओं ने अपनी प्रतिभा से स्थान बनाया है।संगीत और फिल्म क्षेत्र में एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी, गंगूबाई हंगल, लता मंगेशकर, आशा भोसले, ऐश्वर्या राय जैसी हस्तियों ने देश का नाम रोशन किया।उद्योग जगत में सावित्री जिंदल, किरण मजूमदार-शॉ, फाल्गुनी नायर, विनीता सिंह, रोशनी नादर मल्होत्रा, नमिता थापर जैसी महिलाएं भी अग्रणी रही हैं।इन उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि महिलाओं ने बिना आरक्षण के भी अपनी योग्यता और परिश्रम के बल पर ऊँचाइयाँ हासिल की हैं।अंततः यह कहा जा सकता है कि आरक्षण अवसर प्रदान कर सकता है, लेकिन प्रतिभा और उत्कृष्टता का आधार शिक्षा, परिश्रम और निरंतर प्रयास ही होता है।

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