
मुंबई। राज्य के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति के कारण फसलों को व्यापक नुकसान हुआ है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में 2025-26 के गन्ना पेराई सत्र की नई नीति का निर्णय लिया गया। बैठक में तय किया गया कि इस सत्र की शुरुआत 1 नवंबर, 2025 से होगी। बैठक में मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए गन्ने की पेराई दर में 10 रुपये प्रति टन और बाढ़ राहत के लिए 5 रुपये प्रति टन की कटौती करने का निर्णय लिया गया। इस निर्णय का उद्देश्य प्रभावित किसानों को राहत प्रदान करना और बाढ़ प्रभावित इलाकों में सहारा पहुँचाना है। मंत्रिपरिषद की इस बैठक में उपमुख्यमंत्री अजित पवार, जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन, जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल, सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल, कृषि मंत्री दत्तात्रेय भारणे, सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट, सहकारिता विभाग के प्रधान सचिव प्रवीण दराडे, सहकारिता आयुक्त दीपक टावरे और चीनी संघ के प्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि इस वर्ष गन्ने की पेराई के लिए उचित लाभ दर (एफआरपी) 3,550 रुपये प्रति मीट्रिक टन होगी, जिसे 10.25 प्रतिशत मूल अंश को ध्यान में रखते हुए तय किया गया है। पिछले सीजन में राज्य में लगभग 200 चीनी मिलों ने गन्ने की पेराई की थी, जिनमें 99 सहकारी और 101 निजी मिलें शामिल थीं। किसानों को इस दौरान कुल 31,301 करोड़ रुपये का एफआरपी भुगतान किया गया। राज्य ने कुल एफआरपी का 99.06 प्रतिशत भुगतान किया है और 100 प्रतिशत एफआरपी भुगतान करने वाले कारखानों की संख्या 148 है। सह-उत्पादन परियोजना में कारखानों द्वारा 2024-25 में निर्यात की गई बिजली 298 करोड़ यूनिट रही, जिससे कारखानों को 1,979 करोड़ रुपये की आय हुई। इसके अलावा, इथेनॉल की बिक्री से 6,378 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। बैठक में गन्ना कटाई और सह-उत्पादन में मशीनीकरण को बढ़ावा देने के मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर सहकारिता आयुक्त दीपक टावरे ने एक विस्तृत प्रस्तुति दी। बैठक से पहले, केंद्र सरकार द्वारा घोषित अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के अवसर पर राज्य में सहकारी क्षेत्र की प्रगति को दर्शाता एक वीडियो प्रस्तुत किया गया।




