
मुंबई। महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने नागपुर में हाई एनर्जी मेडिकल साइक्लोट्रॉन प्रोजेक्ट (HEMCP) स्थापित करने को मंजूरी दे दी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 300 करोड़ रुपये की व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया। यह परियोजना महाकेयर कंपनी के माध्यम से लागू की जाएगी तथा इसके संचालन और प्रबंधन के लिए एक स्वतंत्र सहायक कंपनी (एसपीवी) गठित की जाएगी। इस परियोजना के शुरू होने से कैंसर के निदान, उपचार और अनुसंधान को नई गति मिलेगी। साथ ही मध्य भारत के लाखों मरीजों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलेगा। नागपुर को रेडियोफार्मास्युटिकल इनोवेशन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों के सटीक निदान और उपचार में मदद मिलेगी। सरकार के अनुसार देश में कैंसर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पीईटी-सीटी और न्यूक्लियर मेडिसिन सेवाओं के लिए आवश्यक रेडियोआइसोटोप की स्थानीय उपलब्धता सुनिश्चित करना इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य है। परियोजना के लिए नागपुर जिले के हिंगणा तहसील स्थित भानसोली (किंही) क्षेत्र में 30 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने को भी मंजूरी दी गई है। परियोजना की कुल लागत 300 करोड़ रुपये होगी, जिसमें से 150 करोड़ रुपये चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा उपलब्ध कराए जाएंगे। शेष खर्च उद्योग विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग के बीच 50:50 अनुपात में साझा किया जाएगा। अंतिम परियोजना रिपोर्ट के बाद भूमि, भवन, मशीनरी और मानव संसाधन संबंधी खर्च का विस्तृत निर्धारण किया जाएगा। नागपुर का भौगोलिक स्थान मध्य भारत में होने के कारण इस परियोजना का लाभ महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के लगभग 500 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले मरीजों को मिलेगा। नागपुर में पहले से ही एम्स, नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट और शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय जैसी संस्थाएं मौजूद होने के कारण इसे परियोजना के लिए उपयुक्त केंद्र माना गया है। इससे कैंसर उपचार के लिए मुंबई और हैदराबाद जैसे शहरों पर निर्भरता भी कम होगी। सरकार का कहना है कि इस परियोजना से मध्य भारत में कैंसर निदान और उपचार सेवाएं मजबूत होंगी, पीईटी-सीटी और न्यूक्लियर मेडिसिन सुविधाओं का विस्तार होगा, मरीजों के उपचार में होने वाली देरी कम होगी तथा परिवहन लागत में भी कमी आएगी। इसके साथ ही चिकित्सा अनुसंधान, प्रशिक्षण और शैक्षणिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। परियोजना के क्रियान्वयन के लिए कंपनी अधिनियम 2013 के तहत एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) का गठन किया जाएगा। इसमें चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त अध्यक्ष तथा उद्योग विभाग के विकास आयुक्त सह-अध्यक्ष होंगे। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवा, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, नागपुर महानगरपालिका, एम्स नागपुर, नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट, टाटा मेमोरियल, आईआईटी मुंबई, आईआईएम नागपुर और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे। एसपीवी के गठन तक परियोजना की निगरानी एक स्टीयरिंग कमेटी करेगी, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. श्रीकर परदेशी करेंगे। सरकार को उम्मीद है कि यह परियोजना मध्य भारत में कैंसर उपचार और आधुनिक चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखेगी।



