
उन्नाव, उत्तर प्रदेश। बरसात के मौसम में सांपों के निकलने और सर्पदंश (सांप काटने) की घटनाओं में तेजी आ जाती है। ऐसे में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बांगरमऊ के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मुकेश कुमार ने क्षेत्रवासियों से जागरूक रहने और अंधविश्वास से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सांप काटने की स्थिति में पीड़ित को बिना समय गंवाए तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाएं। झाड़-फूंक, ओझाई या अन्य अंधविश्वासी तरीकों के चक्कर में पड़ने से मरीज की जान खतरे में पड़ सकती है। डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी जागरूकता के अभाव में कई लोग सर्पदंश के बाद चिकित्सकीय उपचार कराने के बजाय झाड़-फूंक कराने लगते हैं। इससे उपचार में देरी होती है और शरीर में विष तेजी से फैलने के कारण मरीज की हालत गंभीर हो जाती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सांप काटने का एकमात्र प्रभावी इलाज चिकित्सकीय उपचार और एंटी-स्नेक वेनम है। झाड़-फूंक से न तो जहर उतरता है और न ही मरीज की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बांगरमऊ सहित सभी प्रमुख सरकारी अस्पतालों में एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और यह उपचार मरीजों को पूरी तरह निःशुल्क प्रदान किया जाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सर्पदंश की किसी भी घटना में घबराने के बजाय तत्काल मरीज को सरकारी अस्पताल पहुंचाएं, क्योंकि समय पर इलाज मिलने से अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है।



