Thursday, March 19, 2026
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उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को ‘जगद्गुरु संत श्री तुकाराम महाराज’ पुरस्कार से सम्मानित होने पर विधानसभा में चंद्रकांत दादा पाटील ने पेश किया अभिनंदन प्रस्ताव

मुंबई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को प्रतिष्ठित ‘जगद्गुरु संत श्री तुकाराम महाराज’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विधानसभा में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत दादा पाटील ने अभिनंदन प्रस्ताव पेश किया, जिसका उत्तर देते हुए शिंदे ने इसे अपने राजनीतिक और सामाजिक जीवन का सबसे आनंददायक और संतोषजनक क्षण बताया।
पुरस्कार को वारकरी संप्रदाय को किया समर्पित
उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा, “यह पुरस्कार केवल मेरा नहीं है। यह उन सभी वारकरी संतों और किसानों का है, जिन्होंने मुझे और मेरे कार्यों को हमेशा आशीर्वाद दिया। पूजनीय बालासाहेब ठाकरे ने मुझे हिंदुत्व और महाराष्ट्र की सेवा का संकल्प दिया, जबकि धर्मवीर आनंद दिघे ने जनसेवा के संस्कार दिए। तुकाराम महाराज के नाम से प्राप्त यह पुरस्कार उन्हीं संस्कारों का सम्मान है। मैं प्रार्थना करता हूँ कि यह पुरस्काररूपी आशीर्वाद मुझे आम आदमी को सुपरमैन बनाने की और अधिक शक्ति दे। उन्होंने संत तुकाराम महाराज की प्रसिद्ध उक्ति का उल्लेख करते हुए कहा, भले दरी देऊ कासेची लंगोटी, नाठाळाचे माथी हाणू काठी” (यदि कोई व्यक्ति आपके प्रति निष्ठावान है, तो उसे अपनी अंतिम वस्त्र तक दे देना चाहिए, लेकिन यदि कोई छल करता है, तो उसे सही मार्ग पर लाना आवश्यक है)। शिंदे ने कहा कि उन्होंने इस सीख को अपने जीवनभर अपनाया है।
वारकरी संप्रदाय के लिए किए गए कार्य
शिंदे ने अपने कार्यकाल में वारकरी संप्रदाय के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि इतिहास में पहली बार सरकार ने वारकरी दिंडियों के लिए अनुदान दिया। वारकरी समुदाय के लिए एक बीमा योजना शुरू की गई, यात्रा के दौरान लाखों वारकरी संतों के स्वास्थ्य परीक्षण कराए गए, पालखी मार्ग और पंढरपुर के विकास कार्यों को गति दी गई। उन्होंने भगवान विट्ठल के दर्शन हेतु कतारबद्ध प्रणाली के लिए तत्काल निधि जारी की। उन्होंने बताया कि मंदिर संस्कृति और संस्कारों का केंद्र है, इसलिए बी-श्रेणी तीर्थक्षेत्र मंदिरों के लिए निधि 2 करोड़ रूपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रूपए कर दी गई। पहली बार वारकरी संप्रदाय के लिए एक स्वतंत्र महामंडल की स्थापना भी की गई।
वारकरी संप्रदाय की सेवा को बताया कर्तव्य
शिंदे ने जोर देकर कहा कि वारकरी संप्रदाय से बड़ा कोई वीआईपी नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, जब भी मैं पंढरपुर गया, मैंने अपने वीआईपी काफिले को अलग रखकर बुलेट मोटरसाइकिल पर यात्रा की। उन्होंने यह भी कहा कि वारकरी संप्रदाय की सेवा कोई एहसान नहीं बल्कि उनके समाज पर किए गए उपकारों का प्रतिदान है। “वारकरी संप्रदाय के ऋण को कोई सात जन्मों तक भी चुका नहीं सकता,” उन्होंने जोड़ा।
शुद्ध विचारधारा और देश की प्रगति का संदेश
संत तुकाराम महाराज के शब्दों “शुद्धबीजा पोटीं, फळें रसाळ गोमटीं” का उल्लेख करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा, “महा युति सरकार की विचारधारा का बीज शुद्ध है, और यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी के सपनों का भारत विकसित हो रहा है।अंत में, शिंदे ने कहा, यह पुरस्कार मेरे लिए किसी भी पद से बड़ा है। मैं वारकरी संप्रदाय की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहूँगा।

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