
मोतिहारी, बिहार। मोतिहारी में जहरीली शराब ने तबाही मचा दी है, जिससे राज्य की शराबबंदी नीति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले तीन दिनों में 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोग जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। जिला अधिकारी सौरभ जोरवाल ने इन मौतों की पुष्टि की है। मृतकों की पहचान चंदू कुमार, प्रमोद यादव, परीक्षण मांझी, हीरालाल भगत, लालकिशोर राय, संपत साह और लड्डू साह के रूप में हुई है। यह मौतों का सिलसिला रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के बालगंगा गांव में गुरुवार से शुरू हुआ, जब दो लोगों की मौत हुई। इसके बाद शुक्रवार को तीन और शनिवार को दो अन्य लोगों ने दम तोड़ दिया। फिलहाल सदर अस्पताल में 20 लोग भर्ती हैं, जिनमें से 14 की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है, जबकि 6 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई है। जांच में सामने आया है कि इस त्रासदी की जड़ पिपराकोठी थाना क्षेत्र में है, जहां कथित तौर पर तस्करों कन्हैया और राजा ने मेथनॉल युक्त जहरीली स्प्रिट की बड़ी खेप मंगवाई थी। यह स्प्रिट अवैध शराब बनाने में इस्तेमाल की गई, जिसे स्थानीय स्तर पर ‘डेथ कॉकटेल’ के रूप में बेचा जा रहा था। विशेषज्ञों के अनुसार, मेथनॉल बेहद खतरनाक रसायन है, जो अंधापन, लीवर फेलियर और मौत का कारण बन सकता है।
इस अवैध कारोबार का नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से चल रहा था। कन्हैया और राजा ने इस जहरीली स्प्रिट को बिचौलियों खलीफा और सुनील शाह को सौंपा, जिन्होंने इसे आगे मुख्य तस्करों नागा राय और जम्मू बैठा तक पहुंचाया। इसके बाद यह जहरीली शराब गांव-गांव में छोटे दुकानदारों और घरों के जरिए बेची जा रही थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह जहरीली शराब महज 50-60 रुपये प्रति लीटर में चाय की दुकानों पर आसानी से मिल रही थी, जिसे मजदूर वर्ग के लोग थकान मिटाने के लिए पी रहे थे। डॉक्टरों ने बताया कि मेथनॉल युक्त शराब का असर धीरे-धीरे होता है, जिसमें उल्टी, पेट दर्द, सांस लेने में दिक्कत, अंधापन और अंततः मौत हो जाती है। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा पुलिस जांच में हुआ है। भरत राय नामक चौकीदार, जो परसौना क्षेत्र में तैनात था, इस अवैध कारोबार का संरक्षक निकला। वह तस्करों को पुलिस की छापेमारी और गतिविधियों की पहले से जानकारी देता था और इसके बदले मोटा कमीशन लेता था। बताया जा रहा है कि उसका मुख्य आरोपी नागा राय से पारिवारिक संबंध भी है। स्वर्ण प्रभात (एसपी, मोतिहारी) के अनुसार, पुलिस ने अब तक कन्हैया, राजा, खलीफा, सुनील शाह, नागा राय, जम्मू बैठा और भरत राय समेत 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से 200 लीटर स्प्रिट, 500 लीटर अवैध शराब और वाहन जब्त किए गए हैं। फिलहाल एसएसबी और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि 1 से 3 अप्रैल के बीच शराब पीने वाले लोग तुरंत अस्पताल जाकर जांच कराएं।
यह घटना न केवल बिहार में लागू शराबबंदी कानून की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अवैध नेटवर्क और प्रशासनिक मिलीभगत किस तरह आम लोगों की जान के लिए घातक साबित हो रही है।




