
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए अधिक प्रभावी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। सोमवार को सहकार राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने निर्देश दिए हैं कि अण्णासाहेब पाटील आर्थिक पिछड़ा विकास महामंडल की ऋण योजनाओं में बैंकों के साथ-साथ सक्षम सहकारी पतसंस्थाओं (क्रेडिट सोसायटी) को भी शामिल करने संबंधी व्यापक प्रस्ताव तैयार किया जाए। मराठा समाज के युवाओं को उद्योग-धंधों के लिए दी जाने वाली वित्तीय सहायता की प्रक्रिया को अधिक सरल और तेज बनाने के उद्देश्य से मंत्रालय में डॉ. पंकज भोयर की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में बैंकों के साथ योग्य सहकारी पतसंस्थाओं को भी ऋण वितरण प्रक्रिया से जोड़ने पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में अण्णासाहेब पाटील आर्थिक पिछड़ा विकास महामंडल के अध्यक्ष नरेंद्र पाटील, दक्षिण कराड के विधायक डॉ. अतुलबाबा भोसले, सहकार विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, सहकार आयुक्त एवं निबंधक कार्यालय के प्रतिनिधि तथा अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। डॉ. पंकज भोयर ने कहा कि वर्तमान में महामंडल की उद्योग ऋण योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता और ब्याज अनुदान का वितरण बैंकों के माध्यम से किया जाता है। यही कार्य सक्षम सहकारी पतसंस्थाओं के माध्यम से भी प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इन संस्थाओं की मजबूत पहुंच होने के कारण ऋण वितरण प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और लाभार्थियों के लिए सुविधाजनक होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पतसंस्थाओं के चयन के लिए वित्तीय मजबूती, पारदर्शिता और कार्यक्षमता जैसे स्पष्ट मानदंड तय किए जाएं। साथ ही महामंडल की ऋण योजनाओं के लिए सहकारी पतसंस्थाओं के आर्थिक मानकों का निर्धारण कर प्राथमिकता के आधार पर विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए।राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने कहा कि इस पहल से आर्थिक रूप से सक्षम, पारदर्शी और अनुशासित सहकारी पतसंस्थाओं को अवसर मिलेगा। साथ ही विश्वसनीय पतसंस्थाओं के माध्यम से ऋण वितरण होने पर युवाओं को उद्योग स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता अधिक आसानी से उपलब्ध होगी, जिससे राज्य में उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार सृजन में भी तेजी आएगी।



