
मुंबई। व्यसनमुक्त समाज के निर्माण के लिए सरकार के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक, संस्था और समाज के सभी घटकों को जिम्मेदारी लेकर संयुक्त प्रयास करने की आवश्यकता है। यह प्रतिपादन राहुल नार्वेकर ने किया। गुरुवार को यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान में सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग द्वारा वर्ष 2020 से 2025 के बीच दिए गए “राष्ट्रपिता महात्मा गांधी राज्यस्तरीय व्यसनमुक्ति सेवा पुरस्कार” वितरण समारोह में वे बोल रहे थे। कार्यक्रम में रामदास आठवले, संजय शिरसाट, सिद्धाराम म्हेत्रे, डॉ. हर्षदीप कांबळे, दीपा मुधोळ-मुंडे तथा कीर्तनकार सत्यपाल महाराज उपस्थित रहे।
व्यसन सामाजिक और राष्ट्रीय समस्या
नार्वेकर ने कहा कि व्यसन केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर की गंभीर चुनौती है। इसके कारण आर्थिक नुकसान, उत्पादकता में कमी, स्वास्थ्य तंत्र पर दबाव, अपराध में वृद्धि, परिवारों का विघटन और शिक्षा में गिरावट जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। उन्होंने कहा कि भारत एक युवा देश है और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए युवाशक्ति को व्यसन से बचाना अत्यंत आवश्यक है।
100 से अधिक व्यक्तियों और 13 संस्थाओं का सम्मान
समारोह में पिछले पांच वर्षों के दौरान व्यसनमुक्ति के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 100 से अधिक व्यक्तियों और 13 संस्थाओं को सम्मानित किया गया। नार्वेकर ने कहा कि यह कार्य राष्ट्रनिर्माण को मजबूती देने वाला है।
व्यसनमुक्त और गरीबीमुक्त समाज का संकल्प
रामदास आठवले ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में व्यसनमुक्त और गरीबीमुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया गया है। उन्होंने कहा कि नशे की लत से परिवार टूटते हैं और युवाओं पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है, इसलिए इसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
कार्यकर्ताओं का योगदान अमूल्य
संजय शिरसाट ने कहा कि व्यसनमुक्ति के क्षेत्र में काम करने वाले कार्यकर्ता समाज में आशा की किरण हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्य चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन किसी एक परिवार को भी बचाना बड़ी सफलता है। व्यक्तिगत पुरस्कार के तहत 15 हजार रुपये, प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह, शाल, साड़ी, खण और श्रीफल प्रदान किए गए, जबकि संस्थागत पुरस्कार के लिए 30 हजार रुपये, प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह, शाल और श्रीफल दिए गए। पांच वर्षों में कुल 100 व्यक्तियों (88 पुरुष, 12 महिलाएं) और 13 संस्थाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का प्रस्तावना डॉ. हर्षदीप कांबळे ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन दीपा मुधोळ-मुंडे ने किया।




